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Anka Jyotish ke Rahsay

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Anka Jyotish ke Rahsay

अंक ज्योतिष के विभिन्न आयाम विश्व के अलग-अलग क्षेत्रों में प्राचीन काल से ही किसी किसी रूप में विद्यमान रहे हैं हमेशा से अंक ज्योतिष से जुड़े लब्धप्रतिष्ठ पुरोधाओं का मानना रहा है कि अंकों का हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव होताहै तथा किसी खास समूह के अंक जन्म से लेकर मृत्यु तक हमारे जीवन को सकारात्मक अथवा नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं हालाँकि विश्व के विभिन्न हिस्सों में भिन्न-भिन्न प्रकार की पद्धतियाँ प्रचलित हैं तथा उनके विश्लेषण कातरीका भी अलग-अलग है किंतु पाइथागोरस द्वारा प्रतिपादित पद्धति सर्वश्रेष्ठ है अंक ज्योतिष के विभिन्न आयामों में पाइथागोरस, सेफेरियल, कीरो भारतीय वैदिक अंक ज्योतिष आदि प्रचलित हैं, परंतु हमने सभी पद्धतियों का गहनअध्ययन किया और पाया कि पाइथागोरस द्वारा विवेचित पद्धति सर्वोपयोगी एवं सर्वोत्कृष्ट है 'अंक ज्योतिष के रहस्य' में हमने पाइथागोरस की ही पद्धति का अनुसरण किया है हमने पाया है कि इस पद्धति के द्वारा भूत, वर्तमान एवंभविष्य का स्पष्ट आकलन किया जा सकता है हमारे विगत वर्षों से दिए जा रहे आकलन एवं हमारी भविष्यवाणियाँ शत प्रतिशत सही रही हैं

लेखक परिचय

 डॉ० रवीन्द्र कुमार

डॉ० रवीन्द्र कुमार ने IIT, दिल्ली से गणित विषय में अपना शोध पूरा करने के पश्चात् पीएच०डी० की उपाधि 1968 में प्राप्त की तत्पश्चात् और आगे की शोध के लिए इंग्लैण्ड गए तथा वहाँ लंकास्टर एवं लंदन विश्वविद्यालय में अपनी लगनतथा अथक परिश्रम से सफलतापूर्वक पीएच० डी० के उपरान्त का शोध पूरा किया

तत्पश्चात् इन्होंने IIT, दिल्ली में गणित के प्राध्यापक के रूप में 2 वर्षो तक अध्यापन कार्य किया यहाँ से इन्होंने तत्पश्चात् त्यागपत्र दे दिया तथा इसके उपरान्त विश्व के 1 श्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में अलग-अलग देशों में गणित के प्राध्यापकके रूप में अध्यापन कार्य किया प्राध्यापक के रूप में हर जगह इन्होंने श्रेष्ठता हासिल की तथा अनेक उपलब्धियों से नवाजे गए इस दौरान इन्होंने अभियांत्रिकी गणित पर 10 पुस्तकें भी लिखी जो आज अभियांत्रिकी संस्थानों में पाठ्यपुस्तकों की सूची में शामिल हैं

शोध कार्य के दौरान ही 1973 में जब ये लंदन में थे तो इनकी अभिरूचि अंक ज्योतिष में जागृत हुई इन्होंने अंक ज्योतिष का गहन अध्ययन किया तथा इसमें महारत हासिल की विभिन्न देशों में अपने अध्यापन कार्य के दौरान इन्होंनेहजारों अंक कुण्डलियों का विशद् विश्लेषण कर सफल भविष्यवाणियाँ कीं आज इनकी गिनती विश्व के दो-तीन सर्वश्रेष्ठ अंक ज्योतिषियों में होती है

इतना ही नहीं, प्रारंभ से ही इनकी गहरी अभिरूचि अध्यात्म में रही अपने अध्यापन कार्य के दौरान ही कुछ महान गुरूओं से इन्होंने दीक्षा ग्रहण की तथा कठिन साधना में लग गए अध्यापन के अपने दायित्वों को पूर्ण निष्ठा से निभाने केसाथ-साथ ये घंटों साधना में लगे रहते थे इनकी कठिन साधना का फल इन्हें 1987 में प्राप्त हुआ जब ये जिम्बाब्बे में अध्यापन कार्य कर रहे थे इसी समय इन्हें आत्म-अनुभूति हुई तथा इन्हें कुण्डलिनी जागृत होने का अनुभव प्राप्त हुआ इसके उपरान्त पूरी तरह से इनकी अभिरूचि अध्यात्म की ओर झुक गई इन्होंने 1994 में अन्तिम रूप से गणित के प्राध्यापक पद से इस्तीफा दे दिया तथा अपना पूरा समय अध्यात्म को समर्पित कर दिया

1996 में बेल्क शोध संस्थान, अमेरिका ने इन्हें तुलनात्मक धर्म का प्राध्यापक नियुक्त किया कुछ वर्ष यहाँ कार्य करने के पश्चात् इन्होंने ' योग दर्शन एवं साधना ' के प्रोफेसर के रूप में हिन्दू विश्वविद्यालय, फ्लोरिडा में कार्य किया तत्पश्चात्कुण्डलिनी योग के प्रचार-प्रसार के लिए ये डेनमार्क चले गए यहाँ भी इन्होंने उल्लेखनीय कार्य किए तथा कुण्डलिनी योग की दीक्षा देनी प्रारंभ की आज देश-विदेशों में इनके हजारों शिष्य हैं जो इनके मार्गदर्शन में साधना कर रहे हैं तथाएक के बाद एक शिष्य कुण्डलिनी जागृत होने का अनुभव भी प्राप्त कर रहे हैं अपनी इस आध्यात्मिक यात्रा के दौरान इन्होंने अध्यात्म के ऊपर 20 पुस्तकों की रचना की जो 7 से अधिक भाषाओं में प्रकाशित हो चुकी है

 

डॉ० मनोज कुमार

डॉ० मनोज कुमार ने दो विषयों इतिहास एवं लोक प्रशासन में एम०एम० तथा तदुपरान्त पीएच०डी० की उपाधि 1995 में प्राप्त की अपनी विश्वविद्यालयीय शिक्षा पूर्ण करने के उपरान्त इन्होंने करीब एक दशक तक विभिन्न स्थानों परअध्यापन कार्य किए तथा अच्छे शिक्षक के रूप में ख्याति अर्जित की 199 के दशक से ही इनकी अभिरूचि गुप्त विद्याओं एवं अध्यात्म में रही है इन्होंने विधिवत् ज्योतिष (पराशरी, जैमिनी एवं कृष्णमूर्ति पद्धति), अंक ज्योतिष, वास्तुशास्त्र, हस्तरेखा विज्ञान, पिछले जन्म में ले जाना (Past Life Regression), रेकी एवं अन्य आध्यात्मिक उपचारों की पद्धति आदि का गहन एवं विशद अध्ययन इन विषयों के महानतमू गुरूओं के सान्निध्य में किया है तथा उपाधियाँअर्जित की हैं

परम्परागत ज्योतिष अर्थात् पराशरी एवं जैमिनी आदि का अध्ययन इन्होंने विश्व के महानतमू ज्योतिषी एवं भारत सरकार के पूर्व महालेखाकार श्री के०एन० राव के सान्निध्य में इनके मार्गदर्शन में संचालित संस्थान भारतीय विद्या भवन से किया यहाँ इन्हें ज्योतिष अलंकार एवं ज्योतिष आचार्य की उपाधि से नवाजा गया तथा इन्हें चाँदी का पदक प्रदान किया गया

तत्पश्चात् इन्होंने ज्योतिष की कृष्णमूर्ति पद्धति का अध्ययन श्री सी०बी० नारनौली के सान्निध्य में किया जो इस पद्धति के महानतम विद्वानों में से एक हैं तथा वर्तमान में आई०ए०एस० के रूप में भारत सरकार में उच्च पद पर आसीन हैं कृष्णमूर्ति पद्धति ज्योतिष की ऐसी विधा है जिसमें हर भूत, वर्तमान एवं भविष्य की घटनाओं की सही तारीख तथा समय तक की जानकारी मिल जाती है इन्होंने ऐसी हजारों सफल भविष्यवाणियाँ की हैं इन्होंने दोनों प्रकार परम्परागत एवंकृष्णमूर्ति पद्धतियों में अनेक विषयों पर वर्षो शोध किए तथा उनके परिणाम पर आधारित ज्योतिष में नए आयाम जोड़े

इसके उपरान्त इन्होंने हस्तरेखा विज्ञान, अंक ज्योतिष, वास्तुशास्त्र तथा पास्ट लाइफ रिग्रेसन एवं रेकी आदि का गहन अध्ययन किया तथा साथ ही साथ तंत्र साधना की ओर स्वयं को प्रवृत्त किया अभी ये इन विषयों का अध्यापन कर रहे हैंतथा इसमें व्यावसायिक सलाहकार (Professional Consultant) की भी भूमिका निभा रहे हैं इन सभी विषयों में इन्हें महारत हासिल है तथा ये इन सभी विषयों पर पुस्तकें लिख रहे हैं साधना भी इनके जीवन का महत्वपूर्ण अंग है सात्विक तंत्र साधना के माध्यम से इनका उद्देश्य विश्व का कल्याण करना है तंत्र के माध्यम से इन्होंने अनेक पीड़ित लोगों को असीम लाभ पहुँचाया है

 

प्रस्तावना

 

प्रकृति एवं ब्रह्मांड के गुप्त एवं गूढ़ रहस्यों की खोज के प्रति अभिरूचि जीवन काल में नियत समय पर प्रारंभ होती है एवं परिपक्व होने पर शनै : शनै : श्वेत-श्याम पटल की तरह सतह पर परिलक्षित होती है अनेक जन्मों में इसका लगातारअनुसरण करते रहने के उपरान्त व्यक्ति को इस सत्य की प्राप्ति कई तरीकों एवं रूपों में हो सकती है जब व्यक्ति का तीसरा नेत्र अभिदृष्ट होता है तो उसे अपने पिछले जीवन काल की घटनाओं के एक-एक परत की जानकारी मिलती है एवंस्वयं से सम्बद्ध रहस्यों की पिटारी सम्मुख खुली प्रतीत होती है यही कारण है कि पॉल ट्विशेल, जे० कृष्णमूर्ति तथा लिडबीटर जैसे महान व्यक्तित्व ने कई जन्म पहले पाइथागोरस के साथ अपना संबंध एवं साहचर्य महसूस किया बाद मेंउन्होंने दूसरे गुरूओं से दीक्षा ली तथा सत्य का बोध कर पाए

हमारी आत्मा हमारे सभी भूतकालिक सम्बन्धों एवं साहचर्यों को याद रखती है यही कारण है कि हम प्राचीन व्यक्तित्वों को बिना किसी कारण प्यार करते हैं एवं सम्मान देते हैं हम उनके कार्य की सराहना करते हैं. तथा उनके नक्शे-कदम परचलकर उनके कार्य को आगे बढ़ाते हैं पाइथागोरस विलक्षण प्रतिभा के धनी एक अद्भुत व्यक्तित्व थे उनका विकास दो रूपों में हुआ था- आध्यात्मिक एवं अंक ज्योतिष एक ओर तो उन्होंने स्वयं को एक आत्मा के रूप में महसूस किया, ब्रह्मांड की संगीतमय ध्वनि सुनी तथा इस असत्य संसार से मुक्ति प्राप्त की दूसरी' ओर उन्होंने महसूस किया कि सम्पूर्ण ब्रह्मांड अस्रों के साथ जुड़ा हुआ है और उन्होंने अक्ल विज्ञान अथवा अंक ज्योतिष का प्रादुर्भाव किया और लोगों केचरित्र, भूत, .वर्त्तमान एवं भविष्य का सटीक विश्लेषण करने लगे पाइथागोरस के अंक ज्योतिष के उन्हीं सिद्धान्तों को सरलीकृत कर इस पुस्तक के माध्यम से हमने पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने की कोशिश की है आशा है पाठक इसेपसन्द करेंगे एवं इसका भरपूर लाभ उठाएँगे

सम्पूर्ण पुस्तक को सात अध्यायों में विभाजित किया गया है प्रारंभ के दो अध्याय मुख्य रूप से अङ्कों एवं उनके अर्थ, भाव आदि से सम्बन्धित है तृतीय अध्याय चारित्रिक विश्लेषण एवं व्यक्ति के यश-अपयश के सम्बन्ध में है चौथेअध्याय में अङ्क कुंडली बनाने की विधि का विशद् वर्णन है साथ ही अंक ज्योतिष से कैसे भूत, वर्त्तमान एवं भविष्य के बारे में जानकारी हासिल करते हैं इसका विवरण है अध्याय 5 में परिघटना अङ्कों के अर्थ तथा उससे सम्बन्धित अक्षरों केअर्थ बताए गए हैं इसमें घटनाओं का महीना दर महीना क्रमवार विवरण है अध्याय 6 एवं 7 किसी खास क्षेत्र में व्यक्तिगत अभिरूचि से संबंधित है दो व्यक्ति विवाह अथवा व्यापार के लिए यह जानना चाहते हैं कि एक दूसरे के साथउनका सामंजस्य कैसा होगा, एक दूसरे से उनकी बनेगी अथवा नहीं अध्याय 6 एवं 7 में इन्हीं विषयों का विस्तार से वर्णन है साथ ही कोई भी अपने व्यवसाय, पेशे, भाग्यशाली अंक, भाग्यशाली रंग अथवा स्वास्थ्य के विषय में जानकारीप्राप्त करना चाहता है कोई भी जानना चाहता है कि घर अथवा कार का कौन सा नम्बर उसके लिए भाग्यशाली साबित होगा और कौन सा नम्बर उसके लिए बर्बादी का कारण बनेगा इन सभी विषयों की चर्चा विस्तृत रूप से अध्याय 7 मेंकी गई है

व्यक्ति के नाम का जीवन में बड़ा महत्व होता है नाम के अक्षरों सें ही परिघटना अंक का निर्धारण होता है जब कभी भी परिघटना अंक प्रतिकूल अथवा कार्मिक आते हैं तो हमें जीवन में कठिनाइयों अथवा परेशानियों का सामना करनापड़ता है यह परेशानी हमारे लिए अनेक रूपों में सकती है जैसे दफ्तर में तनाव, व्यापार अथवा व्यवसाय में नुकसान या पति/पत्नि से अलगाव, तलाक अथवा अन्य प्रकार के सम्बन्धों में भावनात्मक आघात के रूप में या चोट, दुर्घटना, बीमारी आदि के द्वारा शारीरिक कष्ट के रूप में भी हो सकता है अत : नाम की इस नकारात्मकता को दूर कर इन आसन्न परेशानियों से बचने के लिए नाम के अक्षरों में कुछ फेर बदल करने की सलाह दी जाती है ताकि प्रतिकूल अथवाकार्मिक परिघटना अङ्कों के दुष्प्रभाव से बचा जा सके हमने अपने अनुभवों में यह पाया है कि यह आश्चर्यजनक रूप से कार्य करता है तथा आने वाले अथवा चल रहे बुरे समय को अच्छे समय में बदल देता है नाम के उचित परिवर्त्तन सेघटनाएँ प्रभावित होती हैं ऐसा कहा जाता है कि भाग्य के अनुसार जीवन की मुख्य घटनाएँ निश्चित हैं फिर भी समय और अङ्कों के उचित चयन से सकारात्मक प्रभाव को बढ़ाया एवं नकारात्मक प्रभाव को घटाया जा सकता है अपनेअनुभव में हमने ऐसा होते देखा है

पिछले 15 वर्षों में हमने हजारों व्यक्तियों की अस्र कुंडलियों का विश्लेषण किया है उनमें से 80 को चुनकर इस पुस्तक में उदाहरण के लिए प्रयुक्त किया गया है तथा उनका विशद विश्लेषण पाठकों के लाभ के लिए प्रस्तुत किया गया है आशा है कि पाठक गण इसका भरपूर लाभ उठाएँगे तथा इस क्षेत्र में शोध को और आगे बढ़ाकर नया आयाम जोड़ेंगे

 

विषय-सूची

 

लेखक द्वय का परिचय

ix

 

प्रस्तावना

xiii

1

अङ्कों का विज्ञान

1

 

भूमिका

 
 

अङ्क ज्योतिष का उद्भव एवं प्रारंभिक पृष्ठभूमि

 
 

अङ्क के निहित अर्थ

 
 

दूसरी संख्याएँ

 
 

यौगिक अङ्क

 
 

पूर्व जन्म के कर्मों से संबंधित अङ्क-कार्मिक अङ्क

 

2

विशिष्ट एवं सामान्य अङ्क

35

 

भूमिका

 
 

भाग्यअङ्क

 
 

योग्यता अङ्क

 
 

हृदय अङ्क

 
 

रोमांस एवं प्रेम सम्बन्ध

 
 

व्यक्तित्व अस्र

 
 

चरम अङ्क

 
 

चुनौती अङ्क

 
 

सामान्य अङ्क

 
 

अङ्कों की समक्रमण सारणी

 
 

अङ्कों का संश्लेषण

 
 

निष्कर्ष अर्थ

 

3

चरित्र विन्यास

81

 

भूमिका

 
 

प्रबलता सारणी

 
 

स्वभाव

 
 

स्वभाव की रूपरेखा

 
 

महानता का मापदंड-यश अथवा अपयश

 
 

व्यावसायिक मार्गदर्शन

 
 

निष्कर्ष

 

4

अङ्क कुण्डली

129

 

भूत, वर्तमान एवं भविष्य का ज्ञान

 
 

भूमिका

 
 

जन्म-बल काल

 
 

जीवन का विभाजन-चार चतुर्थांश (कलश)

 
 

व्यक्तिगत वर्ष

 
 

परिघटना अड

 
 

अङ्क कुण्डली

 
 

महत्वपूर्ण परिघटना अङ्क एवं अक्षर

 
 

महत्वपूर्ण व्यक्तिगत वर्ष

 
 

निष्कर्ष

 

5

परिघटना अङ्कों एवं अक्षरों के अर्थ

181

 

भूमिका

 
 

परिघटना अङ्कों के अर्थ

 
 

अक्षरों के विहित अर्थ

 
 

व्यक्तिगत महीना- महीना दर महीना घटनाओं की तालिका

 
 

निष्कर्ष

 

6

प्रेम एवं विवाह, अलगाव एवं तलाक, सामान्य साहचर्य एवं व्यावसायिक साझेदारी

221

 

भूमिंका

 
 

सम्बन्धों का मापदंड

 
 

व्यावसायिक साझेदारी

 
 

निष्कर्ष

 

7

वैयक्तिक अभिरूचि के क्षेत्र

273

 

पेशा/व्यवसाय

 
 

भाग्यशाली अङ्क

 
 

रंग

 
 

ग्रह एवं बेशकीमती रत्न

 
 

स्वास्थ्य घर, शहर, टेलीफोन एवं कार के नम्बर

 
 

बच्चे का नामकरण, नाम परिवर्तन

 
 

अन्तिम शब्द

 

 

अंक ज्योतिष के विभिन्न आयाम विश्व के अलग-अलग क्षेत्रों में प्राचीन काल से ही किसी किसी रूप में विद्यमान रहे हैं हमेशा से अंक ज्योतिष से जुड़े लब्धप्रतिष्ठ पुरोधाओं का मानना रहा है कि अंकों का हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव होताहै तथा किसी खास समूह के अंक जन्म से लेकर मृत्यु तक हमारे जीवन को सकारात्मक अथवा नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं हालाँकि विश्व के विभिन्न हिस्सों में भिन्न-भिन्न प्रकार की पद्धतियाँ प्रचलित हैं तथा उनके विश्लेषण कातरीका भी अलग-अलग है किंतु पाइथागोरस द्वारा प्रतिपादित पद्धति सर्वश्रेष्ठ है अंक ज्योतिष के विभिन्न आयामों में पाइथागोरस, सेफेरियल, कीरो भारतीय वैदिक अंक ज्योतिष आदि प्रचलित हैं, परंतु हमने सभी पद्धतियों का गहनअध्ययन किया और पाया कि पाइथागोरस द्वारा विवेचित पद्धति सर्वोपयोगी एवं सर्वोत्कृष्ट है 'अंक ज्योतिष के रहस्य' में हमने पाइथागोरस की ही पद्धति का अनुसरण किया है हमने पाया है कि इस पद्धति के द्वारा भूत, वर्तमान एवंभविष्य का स्पष्ट आकलन किया जा सकता है हमारे विगत वर्षों से दिए जा रहे आकलन एवं हमारी भविष्यवाणियाँ शत प्रतिशत सही रही हैं

लेखक परिचय

 डॉ० रवीन्द्र कुमार

डॉ० रवीन्द्र कुमार ने IIT, दिल्ली से गणित विषय में अपना शोध पूरा करने के पश्चात् पीएच०डी० की उपाधि 1968 में प्राप्त की तत्पश्चात् और आगे की शोध के लिए इंग्लैण्ड गए तथा वहाँ लंकास्टर एवं लंदन विश्वविद्यालय में अपनी लगनतथा अथक परिश्रम से सफलतापूर्वक पीएच० डी० के उपरान्त का शोध पूरा किया

तत्पश्चात् इन्होंने IIT, दिल्ली में गणित के प्राध्यापक के रूप में 2 वर्षो तक अध्यापन कार्य किया यहाँ से इन्होंने तत्पश्चात् त्यागपत्र दे दिया तथा इसके उपरान्त विश्व के 1 श्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में अलग-अलग देशों में गणित के प्राध्यापकके रूप में अध्यापन कार्य किया प्राध्यापक के रूप में हर जगह इन्होंने श्रेष्ठता हासिल की तथा अनेक उपलब्धियों से नवाजे गए इस दौरान इन्होंने अभियांत्रिकी गणित पर 10 पुस्तकें भी लिखी जो आज अभियांत्रिकी संस्थानों में पाठ्यपुस्तकों की सूची में शामिल हैं

शोध कार्य के दौरान ही 1973 में जब ये लंदन में थे तो इनकी अभिरूचि अंक ज्योतिष में जागृत हुई इन्होंने अंक ज्योतिष का गहन अध्ययन किया तथा इसमें महारत हासिल की विभिन्न देशों में अपने अध्यापन कार्य के दौरान इन्होंनेहजारों अंक कुण्डलियों का विशद् विश्लेषण कर सफल भविष्यवाणियाँ कीं आज इनकी गिनती विश्व के दो-तीन सर्वश्रेष्ठ अंक ज्योतिषियों में होती है

इतना ही नहीं, प्रारंभ से ही इनकी गहरी अभिरूचि अध्यात्म में रही अपने अध्यापन कार्य के दौरान ही कुछ महान गुरूओं से इन्होंने दीक्षा ग्रहण की तथा कठिन साधना में लग गए अध्यापन के अपने दायित्वों को पूर्ण निष्ठा से निभाने केसाथ-साथ ये घंटों साधना में लगे रहते थे इनकी कठिन साधना का फल इन्हें 1987 में प्राप्त हुआ जब ये जिम्बाब्बे में अध्यापन कार्य कर रहे थे इसी समय इन्हें आत्म-अनुभूति हुई तथा इन्हें कुण्डलिनी जागृत होने का अनुभव प्राप्त हुआ इसके उपरान्त पूरी तरह से इनकी अभिरूचि अध्यात्म की ओर झुक गई इन्होंने 1994 में अन्तिम रूप से गणित के प्राध्यापक पद से इस्तीफा दे दिया तथा अपना पूरा समय अध्यात्म को समर्पित कर दिया

1996 में बेल्क शोध संस्थान, अमेरिका ने इन्हें तुलनात्मक धर्म का प्राध्यापक नियुक्त किया कुछ वर्ष यहाँ कार्य करने के पश्चात् इन्होंने ' योग दर्शन एवं साधना ' के प्रोफेसर के रूप में हिन्दू विश्वविद्यालय, फ्लोरिडा में कार्य किया तत्पश्चात्कुण्डलिनी योग के प्रचार-प्रसार के लिए ये डेनमार्क चले गए यहाँ भी इन्होंने उल्लेखनीय कार्य किए तथा कुण्डलिनी योग की दीक्षा देनी प्रारंभ की आज देश-विदेशों में इनके हजारों शिष्य हैं जो इनके मार्गदर्शन में साधना कर रहे हैं तथाएक के बाद एक शिष्य कुण्डलिनी जागृत होने का अनुभव भी प्राप्त कर रहे हैं अपनी इस आध्यात्मिक यात्रा के दौरान इन्होंने अध्यात्म के ऊपर 20 पुस्तकों की रचना की जो 7 से अधिक भाषाओं में प्रकाशित हो चुकी है

 

डॉ० मनोज कुमार

डॉ० मनोज कुमार ने दो विषयों इतिहास एवं लोक प्रशासन में एम०एम० तथा तदुपरान्त पीएच०डी० की उपाधि 1995 में प्राप्त की अपनी विश्वविद्यालयीय शिक्षा पूर्ण करने के उपरान्त इन्होंने करीब एक दशक तक विभिन्न स्थानों परअध्यापन कार्य किए तथा अच्छे शिक्षक के रूप में ख्याति अर्जित की 199 के दशक से ही इनकी अभिरूचि गुप्त विद्याओं एवं अध्यात्म में रही है इन्होंने विधिवत् ज्योतिष (पराशरी, जैमिनी एवं कृष्णमूर्ति पद्धति), अंक ज्योतिष, वास्तुशास्त्र, हस्तरेखा विज्ञान, पिछले जन्म में ले जाना (Past Life Regression), रेकी एवं अन्य आध्यात्मिक उपचारों की पद्धति आदि का गहन एवं विशद अध्ययन इन विषयों के महानतमू गुरूओं के सान्निध्य में किया है तथा उपाधियाँअर्जित की हैं

परम्परागत ज्योतिष अर्थात् पराशरी एवं जैमिनी आदि का अध्ययन इन्होंने विश्व के महानतमू ज्योतिषी एवं भारत सरकार के पूर्व महालेखाकार श्री के०एन० राव के सान्निध्य में इनके मार्गदर्शन में संचालित संस्थान भारतीय विद्या भवन से किया यहाँ इन्हें ज्योतिष अलंकार एवं ज्योतिष आचार्य की उपाधि से नवाजा गया तथा इन्हें चाँदी का पदक प्रदान किया गया

तत्पश्चात् इन्होंने ज्योतिष की कृष्णमूर्ति पद्धति का अध्ययन श्री सी०बी० नारनौली के सान्निध्य में किया जो इस पद्धति के महानतम विद्वानों में से एक हैं तथा वर्तमान में आई०ए०एस० के रूप में भारत सरकार में उच्च पद पर आसीन हैं कृष्णमूर्ति पद्धति ज्योतिष की ऐसी विधा है जिसमें हर भूत, वर्तमान एवं भविष्य की घटनाओं की सही तारीख तथा समय तक की जानकारी मिल जाती है इन्होंने ऐसी हजारों सफल भविष्यवाणियाँ की हैं इन्होंने दोनों प्रकार परम्परागत एवंकृष्णमूर्ति पद्धतियों में अनेक विषयों पर वर्षो शोध किए तथा उनके परिणाम पर आधारित ज्योतिष में नए आयाम जोड़े

इसके उपरान्त इन्होंने हस्तरेखा विज्ञान, अंक ज्योतिष, वास्तुशास्त्र तथा पास्ट लाइफ रिग्रेसन एवं रेकी आदि का गहन अध्ययन किया तथा साथ ही साथ तंत्र साधना की ओर स्वयं को प्रवृत्त किया अभी ये इन विषयों का अध्यापन कर रहे हैंतथा इसमें व्यावसायिक सलाहकार (Professional Consultant) की भी भूमिका निभा रहे हैं इन सभी विषयों में इन्हें महारत हासिल है तथा ये इन सभी विषयों पर पुस्तकें लिख रहे हैं साधना भी इनके जीवन का महत्वपूर्ण अंग है सात्विक तंत्र साधना के माध्यम से इनका उद्देश्य विश्व का कल्याण करना है तंत्र के माध्यम से इन्होंने अनेक पीड़ित लोगों को असीम लाभ पहुँचाया है

 

प्रस्तावना

 

प्रकृति एवं ब्रह्मांड के गुप्त एवं गूढ़ रहस्यों की खोज के प्रति अभिरूचि जीवन काल में नियत समय पर प्रारंभ होती है एवं परिपक्व होने पर शनै : शनै : श्वेत-श्याम पटल की तरह सतह पर परिलक्षित होती है अनेक जन्मों में इसका लगातारअनुसरण करते रहने के उपरान्त व्यक्ति को इस सत्य की प्राप्ति कई तरीकों एवं रूपों में हो सकती है जब व्यक्ति का तीसरा नेत्र अभिदृष्ट होता है तो उसे अपने पिछले जीवन काल की घटनाओं के एक-एक परत की जानकारी मिलती है एवंस्वयं से सम्बद्ध रहस्यों की पिटारी सम्मुख खुली प्रतीत होती है यही कारण है कि पॉल ट्विशेल, जे० कृष्णमूर्ति तथा लिडबीटर जैसे महान व्यक्तित्व ने कई जन्म पहले पाइथागोरस के साथ अपना संबंध एवं साहचर्य महसूस किया बाद मेंउन्होंने दूसरे गुरूओं से दीक्षा ली तथा सत्य का बोध कर पाए

हमारी आत्मा हमारे सभी भूतकालिक सम्बन्धों एवं साहचर्यों को याद रखती है यही कारण है कि हम प्राचीन व्यक्तित्वों को बिना किसी कारण प्यार करते हैं एवं सम्मान देते हैं हम उनके कार्य की सराहना करते हैं. तथा उनके नक्शे-कदम परचलकर उनके कार्य को आगे बढ़ाते हैं पाइथागोरस विलक्षण प्रतिभा के धनी एक अद्भुत व्यक्तित्व थे उनका विकास दो रूपों में हुआ था- आध्यात्मिक एवं अंक ज्योतिष एक ओर तो उन्होंने स्वयं को एक आत्मा के रूप में महसूस किया, ब्रह्मांड की संगीतमय ध्वनि सुनी तथा इस असत्य संसार से मुक्ति प्राप्त की दूसरी' ओर उन्होंने महसूस किया कि सम्पूर्ण ब्रह्मांड अस्रों के साथ जुड़ा हुआ है और उन्होंने अक्ल विज्ञान अथवा अंक ज्योतिष का प्रादुर्भाव किया और लोगों केचरित्र, भूत, .वर्त्तमान एवं भविष्य का सटीक विश्लेषण करने लगे पाइथागोरस के अंक ज्योतिष के उन्हीं सिद्धान्तों को सरलीकृत कर इस पुस्तक के माध्यम से हमने पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने की कोशिश की है आशा है पाठक इसेपसन्द करेंगे एवं इसका भरपूर लाभ उठाएँगे

सम्पूर्ण पुस्तक को सात अध्यायों में विभाजित किया गया है प्रारंभ के दो अध्याय मुख्य रूप से अङ्कों एवं उनके अर्थ, भाव आदि से सम्बन्धित है तृतीय अध्याय चारित्रिक विश्लेषण एवं व्यक्ति के यश-अपयश के सम्बन्ध में है चौथेअध्याय में अङ्क कुंडली बनाने की विधि का विशद् वर्णन है साथ ही अंक ज्योतिष से कैसे भूत, वर्त्तमान एवं भविष्य के बारे में जानकारी हासिल करते हैं इसका विवरण है अध्याय 5 में परिघटना अङ्कों के अर्थ तथा उससे सम्बन्धित अक्षरों केअर्थ बताए गए हैं इसमें घटनाओं का महीना दर महीना क्रमवार विवरण है अध्याय 6 एवं 7 किसी खास क्षेत्र में व्यक्तिगत अभिरूचि से संबंधित है दो व्यक्ति विवाह अथवा व्यापार के लिए यह जानना चाहते हैं कि एक दूसरे के साथउनका सामंजस्य कैसा होगा, एक दूसरे से उनकी बनेगी अथवा नहीं अध्याय 6 एवं 7 में इन्हीं विषयों का विस्तार से वर्णन है साथ ही कोई भी अपने व्यवसाय, पेशे, भाग्यशाली अंक, भाग्यशाली रंग अथवा स्वास्थ्य के विषय में जानकारीप्राप्त करना चाहता है कोई भी जानना चाहता है कि घर अथवा कार का कौन सा नम्बर उसके लिए भाग्यशाली साबित होगा और कौन सा नम्बर उसके लिए बर्बादी का कारण बनेगा इन सभी विषयों की चर्चा विस्तृत रूप से अध्याय 7 मेंकी गई है

व्यक्ति के नाम का जीवन में बड़ा महत्व होता है नाम के अक्षरों सें ही परिघटना अंक का निर्धारण होता है जब कभी भी परिघटना अंक प्रतिकूल अथवा कार्मिक आते हैं तो हमें जीवन में कठिनाइयों अथवा परेशानियों का सामना करनापड़ता है यह परेशानी हमारे लिए अनेक रूपों में सकती है जैसे दफ्तर में तनाव, व्यापार अथवा व्यवसाय में नुकसान या पति/पत्नि से अलगाव, तलाक अथवा अन्य प्रकार के सम्बन्धों में भावनात्मक आघात के रूप में या चोट, दुर्घटना, बीमारी आदि के द्वारा शारीरिक कष्ट के रूप में भी हो सकता है अत : नाम की इस नकारात्मकता को दूर कर इन आसन्न परेशानियों से बचने के लिए नाम के अक्षरों में कुछ फेर बदल करने की सलाह दी जाती है ताकि प्रतिकूल अथवाकार्मिक परिघटना अङ्कों के दुष्प्रभाव से बचा जा सके हमने अपने अनुभवों में यह पाया है कि यह आश्चर्यजनक रूप से कार्य करता है तथा आने वाले अथवा चल रहे बुरे समय को अच्छे समय में बदल देता है नाम के उचित परिवर्त्तन सेघटनाएँ प्रभावित होती हैं ऐसा कहा जाता है कि भाग्य के अनुसार जीवन की मुख्य घटनाएँ निश्चित हैं फिर भी समय और अङ्कों के उचित चयन से सकारात्मक प्रभाव को बढ़ाया एवं नकारात्मक प्रभाव को घटाया जा सकता है अपनेअनुभव में हमने ऐसा होते देखा है

पिछले 15 वर्षों में हमने हजारों व्यक्तियों की अस्र कुंडलियों का विश्लेषण किया है उनमें से 80 को चुनकर इस पुस्तक में उदाहरण के लिए प्रयुक्त किया गया है तथा उनका विशद विश्लेषण पाठकों के लाभ के लिए प्रस्तुत किया गया है आशा है कि पाठक गण इसका भरपूर लाभ उठाएँगे तथा इस क्षेत्र में शोध को और आगे बढ़ाकर नया आयाम जोड़ेंगे

 

विषय-सूची

 

लेखक द्वय का परिचय

ix

 

प्रस्तावना

xiii

1

अङ्कों का विज्ञान

1

 

भूमिका

 
 

अङ्क ज्योतिष का उद्भव एवं प्रारंभिक पृष्ठभूमि

 
 

अङ्क के निहित अर्थ

 
 

दूसरी संख्याएँ

 
 

यौगिक अङ्क

 
 

पूर्व जन्म के कर्मों से संबंधित अङ्क-कार्मिक अङ्क

 

2

विशिष्ट एवं सामान्य अङ्क

35

 

भूमिका

 
 

भाग्यअङ्क

 
 

योग्यता अङ्क

 
 

हृदय अङ्क

 
 

रोमांस एवं प्रेम सम्बन्ध

 
 

व्यक्तित्व अस्र

 
 

चरम अङ्क

 
 

चुनौती अङ्क

 
 

सामान्य अङ्क

 
 

अङ्कों की समक्रमण सारणी

 
 

अङ्कों का संश्लेषण

 
 

निष्कर्ष अर्थ

 

3

चरित्र विन्यास

81

 

भूमिका

 
 

प्रबलता सारणी

 
 

स्वभाव

 
 

स्वभाव की रूपरेखा

 
 

महानता का मापदंड-यश अथवा अपयश

 
 

व्यावसायिक मार्गदर्शन

 
 

निष्कर्ष

 

4

अङ्क कुण्डली

129

 

भूत, वर्तमान एवं भविष्य का ज्ञान

 
 

भूमिका

 
 

जन्म-बल काल

 
 

जीवन का विभाजन-चार चतुर्थांश (कलश)

 
 

व्यक्तिगत वर्ष

 
 

परिघटना अड

 
 

अङ्क कुण्डली

 
 

महत्वपूर्ण परिघटना अङ्क एवं अक्षर

 
 

महत्वपूर्ण व्यक्तिगत वर्ष

 
 

निष्कर्ष

 

5

परिघटना अङ्कों एवं अक्षरों के अर्थ

181

 

भूमिका

 
 

परिघटना अङ्कों के अर्थ

 
 

अक्षरों के विहित अर्थ

 
 

व्यक्तिगत महीना- महीना दर महीना घटनाओं की तालिका

 
 

निष्कर्ष

 

6

प्रेम एवं विवाह, अलगाव एवं तलाक, सामान्य साहचर्य एवं व्यावसायिक साझेदारी

221

 

भूमिंका

 
 

सम्बन्धों का मापदंड

 
 

व्यावसायिक साझेदारी

 
 

निष्कर्ष

 

7

वैयक्तिक अभिरूचि के क्षेत्र

273

 

पेशा/व्यवसाय

 
 

भाग्यशाली अङ्क

 
 

रंग

 
 

ग्रह एवं बेशकीमती रत्न

 
 

स्वास्थ्य घर, शहर, टेलीफोन एवं कार के नम्बर

 
 

बच्चे का नामकरण, नाम परिवर्तन

 
 

अन्तिम शब्द

 

 

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Original: $3.72

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Anka Jyotish ke Rahsay

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Description

अंक ज्योतिष के विभिन्न आयाम विश्व के अलग-अलग क्षेत्रों में प्राचीन काल से ही किसी किसी रूप में विद्यमान रहे हैं हमेशा से अंक ज्योतिष से जुड़े लब्धप्रतिष्ठ पुरोधाओं का मानना रहा है कि अंकों का हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव होताहै तथा किसी खास समूह के अंक जन्म से लेकर मृत्यु तक हमारे जीवन को सकारात्मक अथवा नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं हालाँकि विश्व के विभिन्न हिस्सों में भिन्न-भिन्न प्रकार की पद्धतियाँ प्रचलित हैं तथा उनके विश्लेषण कातरीका भी अलग-अलग है किंतु पाइथागोरस द्वारा प्रतिपादित पद्धति सर्वश्रेष्ठ है अंक ज्योतिष के विभिन्न आयामों में पाइथागोरस, सेफेरियल, कीरो भारतीय वैदिक अंक ज्योतिष आदि प्रचलित हैं, परंतु हमने सभी पद्धतियों का गहनअध्ययन किया और पाया कि पाइथागोरस द्वारा विवेचित पद्धति सर्वोपयोगी एवं सर्वोत्कृष्ट है 'अंक ज्योतिष के रहस्य' में हमने पाइथागोरस की ही पद्धति का अनुसरण किया है हमने पाया है कि इस पद्धति के द्वारा भूत, वर्तमान एवंभविष्य का स्पष्ट आकलन किया जा सकता है हमारे विगत वर्षों से दिए जा रहे आकलन एवं हमारी भविष्यवाणियाँ शत प्रतिशत सही रही हैं

लेखक परिचय

 डॉ० रवीन्द्र कुमार

डॉ० रवीन्द्र कुमार ने IIT, दिल्ली से गणित विषय में अपना शोध पूरा करने के पश्चात् पीएच०डी० की उपाधि 1968 में प्राप्त की तत्पश्चात् और आगे की शोध के लिए इंग्लैण्ड गए तथा वहाँ लंकास्टर एवं लंदन विश्वविद्यालय में अपनी लगनतथा अथक परिश्रम से सफलतापूर्वक पीएच० डी० के उपरान्त का शोध पूरा किया

तत्पश्चात् इन्होंने IIT, दिल्ली में गणित के प्राध्यापक के रूप में 2 वर्षो तक अध्यापन कार्य किया यहाँ से इन्होंने तत्पश्चात् त्यागपत्र दे दिया तथा इसके उपरान्त विश्व के 1 श्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में अलग-अलग देशों में गणित के प्राध्यापकके रूप में अध्यापन कार्य किया प्राध्यापक के रूप में हर जगह इन्होंने श्रेष्ठता हासिल की तथा अनेक उपलब्धियों से नवाजे गए इस दौरान इन्होंने अभियांत्रिकी गणित पर 10 पुस्तकें भी लिखी जो आज अभियांत्रिकी संस्थानों में पाठ्यपुस्तकों की सूची में शामिल हैं

शोध कार्य के दौरान ही 1973 में जब ये लंदन में थे तो इनकी अभिरूचि अंक ज्योतिष में जागृत हुई इन्होंने अंक ज्योतिष का गहन अध्ययन किया तथा इसमें महारत हासिल की विभिन्न देशों में अपने अध्यापन कार्य के दौरान इन्होंनेहजारों अंक कुण्डलियों का विशद् विश्लेषण कर सफल भविष्यवाणियाँ कीं आज इनकी गिनती विश्व के दो-तीन सर्वश्रेष्ठ अंक ज्योतिषियों में होती है

इतना ही नहीं, प्रारंभ से ही इनकी गहरी अभिरूचि अध्यात्म में रही अपने अध्यापन कार्य के दौरान ही कुछ महान गुरूओं से इन्होंने दीक्षा ग्रहण की तथा कठिन साधना में लग गए अध्यापन के अपने दायित्वों को पूर्ण निष्ठा से निभाने केसाथ-साथ ये घंटों साधना में लगे रहते थे इनकी कठिन साधना का फल इन्हें 1987 में प्राप्त हुआ जब ये जिम्बाब्बे में अध्यापन कार्य कर रहे थे इसी समय इन्हें आत्म-अनुभूति हुई तथा इन्हें कुण्डलिनी जागृत होने का अनुभव प्राप्त हुआ इसके उपरान्त पूरी तरह से इनकी अभिरूचि अध्यात्म की ओर झुक गई इन्होंने 1994 में अन्तिम रूप से गणित के प्राध्यापक पद से इस्तीफा दे दिया तथा अपना पूरा समय अध्यात्म को समर्पित कर दिया

1996 में बेल्क शोध संस्थान, अमेरिका ने इन्हें तुलनात्मक धर्म का प्राध्यापक नियुक्त किया कुछ वर्ष यहाँ कार्य करने के पश्चात् इन्होंने ' योग दर्शन एवं साधना ' के प्रोफेसर के रूप में हिन्दू विश्वविद्यालय, फ्लोरिडा में कार्य किया तत्पश्चात्कुण्डलिनी योग के प्रचार-प्रसार के लिए ये डेनमार्क चले गए यहाँ भी इन्होंने उल्लेखनीय कार्य किए तथा कुण्डलिनी योग की दीक्षा देनी प्रारंभ की आज देश-विदेशों में इनके हजारों शिष्य हैं जो इनके मार्गदर्शन में साधना कर रहे हैं तथाएक के बाद एक शिष्य कुण्डलिनी जागृत होने का अनुभव भी प्राप्त कर रहे हैं अपनी इस आध्यात्मिक यात्रा के दौरान इन्होंने अध्यात्म के ऊपर 20 पुस्तकों की रचना की जो 7 से अधिक भाषाओं में प्रकाशित हो चुकी है

 

डॉ० मनोज कुमार

डॉ० मनोज कुमार ने दो विषयों इतिहास एवं लोक प्रशासन में एम०एम० तथा तदुपरान्त पीएच०डी० की उपाधि 1995 में प्राप्त की अपनी विश्वविद्यालयीय शिक्षा पूर्ण करने के उपरान्त इन्होंने करीब एक दशक तक विभिन्न स्थानों परअध्यापन कार्य किए तथा अच्छे शिक्षक के रूप में ख्याति अर्जित की 199 के दशक से ही इनकी अभिरूचि गुप्त विद्याओं एवं अध्यात्म में रही है इन्होंने विधिवत् ज्योतिष (पराशरी, जैमिनी एवं कृष्णमूर्ति पद्धति), अंक ज्योतिष, वास्तुशास्त्र, हस्तरेखा विज्ञान, पिछले जन्म में ले जाना (Past Life Regression), रेकी एवं अन्य आध्यात्मिक उपचारों की पद्धति आदि का गहन एवं विशद अध्ययन इन विषयों के महानतमू गुरूओं के सान्निध्य में किया है तथा उपाधियाँअर्जित की हैं

परम्परागत ज्योतिष अर्थात् पराशरी एवं जैमिनी आदि का अध्ययन इन्होंने विश्व के महानतमू ज्योतिषी एवं भारत सरकार के पूर्व महालेखाकार श्री के०एन० राव के सान्निध्य में इनके मार्गदर्शन में संचालित संस्थान भारतीय विद्या भवन से किया यहाँ इन्हें ज्योतिष अलंकार एवं ज्योतिष आचार्य की उपाधि से नवाजा गया तथा इन्हें चाँदी का पदक प्रदान किया गया

तत्पश्चात् इन्होंने ज्योतिष की कृष्णमूर्ति पद्धति का अध्ययन श्री सी०बी० नारनौली के सान्निध्य में किया जो इस पद्धति के महानतम विद्वानों में से एक हैं तथा वर्तमान में आई०ए०एस० के रूप में भारत सरकार में उच्च पद पर आसीन हैं कृष्णमूर्ति पद्धति ज्योतिष की ऐसी विधा है जिसमें हर भूत, वर्तमान एवं भविष्य की घटनाओं की सही तारीख तथा समय तक की जानकारी मिल जाती है इन्होंने ऐसी हजारों सफल भविष्यवाणियाँ की हैं इन्होंने दोनों प्रकार परम्परागत एवंकृष्णमूर्ति पद्धतियों में अनेक विषयों पर वर्षो शोध किए तथा उनके परिणाम पर आधारित ज्योतिष में नए आयाम जोड़े

इसके उपरान्त इन्होंने हस्तरेखा विज्ञान, अंक ज्योतिष, वास्तुशास्त्र तथा पास्ट लाइफ रिग्रेसन एवं रेकी आदि का गहन अध्ययन किया तथा साथ ही साथ तंत्र साधना की ओर स्वयं को प्रवृत्त किया अभी ये इन विषयों का अध्यापन कर रहे हैंतथा इसमें व्यावसायिक सलाहकार (Professional Consultant) की भी भूमिका निभा रहे हैं इन सभी विषयों में इन्हें महारत हासिल है तथा ये इन सभी विषयों पर पुस्तकें लिख रहे हैं साधना भी इनके जीवन का महत्वपूर्ण अंग है सात्विक तंत्र साधना के माध्यम से इनका उद्देश्य विश्व का कल्याण करना है तंत्र के माध्यम से इन्होंने अनेक पीड़ित लोगों को असीम लाभ पहुँचाया है

 

प्रस्तावना

 

प्रकृति एवं ब्रह्मांड के गुप्त एवं गूढ़ रहस्यों की खोज के प्रति अभिरूचि जीवन काल में नियत समय पर प्रारंभ होती है एवं परिपक्व होने पर शनै : शनै : श्वेत-श्याम पटल की तरह सतह पर परिलक्षित होती है अनेक जन्मों में इसका लगातारअनुसरण करते रहने के उपरान्त व्यक्ति को इस सत्य की प्राप्ति कई तरीकों एवं रूपों में हो सकती है जब व्यक्ति का तीसरा नेत्र अभिदृष्ट होता है तो उसे अपने पिछले जीवन काल की घटनाओं के एक-एक परत की जानकारी मिलती है एवंस्वयं से सम्बद्ध रहस्यों की पिटारी सम्मुख खुली प्रतीत होती है यही कारण है कि पॉल ट्विशेल, जे० कृष्णमूर्ति तथा लिडबीटर जैसे महान व्यक्तित्व ने कई जन्म पहले पाइथागोरस के साथ अपना संबंध एवं साहचर्य महसूस किया बाद मेंउन्होंने दूसरे गुरूओं से दीक्षा ली तथा सत्य का बोध कर पाए

हमारी आत्मा हमारे सभी भूतकालिक सम्बन्धों एवं साहचर्यों को याद रखती है यही कारण है कि हम प्राचीन व्यक्तित्वों को बिना किसी कारण प्यार करते हैं एवं सम्मान देते हैं हम उनके कार्य की सराहना करते हैं. तथा उनके नक्शे-कदम परचलकर उनके कार्य को आगे बढ़ाते हैं पाइथागोरस विलक्षण प्रतिभा के धनी एक अद्भुत व्यक्तित्व थे उनका विकास दो रूपों में हुआ था- आध्यात्मिक एवं अंक ज्योतिष एक ओर तो उन्होंने स्वयं को एक आत्मा के रूप में महसूस किया, ब्रह्मांड की संगीतमय ध्वनि सुनी तथा इस असत्य संसार से मुक्ति प्राप्त की दूसरी' ओर उन्होंने महसूस किया कि सम्पूर्ण ब्रह्मांड अस्रों के साथ जुड़ा हुआ है और उन्होंने अक्ल विज्ञान अथवा अंक ज्योतिष का प्रादुर्भाव किया और लोगों केचरित्र, भूत, .वर्त्तमान एवं भविष्य का सटीक विश्लेषण करने लगे पाइथागोरस के अंक ज्योतिष के उन्हीं सिद्धान्तों को सरलीकृत कर इस पुस्तक के माध्यम से हमने पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने की कोशिश की है आशा है पाठक इसेपसन्द करेंगे एवं इसका भरपूर लाभ उठाएँगे

सम्पूर्ण पुस्तक को सात अध्यायों में विभाजित किया गया है प्रारंभ के दो अध्याय मुख्य रूप से अङ्कों एवं उनके अर्थ, भाव आदि से सम्बन्धित है तृतीय अध्याय चारित्रिक विश्लेषण एवं व्यक्ति के यश-अपयश के सम्बन्ध में है चौथेअध्याय में अङ्क कुंडली बनाने की विधि का विशद् वर्णन है साथ ही अंक ज्योतिष से कैसे भूत, वर्त्तमान एवं भविष्य के बारे में जानकारी हासिल करते हैं इसका विवरण है अध्याय 5 में परिघटना अङ्कों के अर्थ तथा उससे सम्बन्धित अक्षरों केअर्थ बताए गए हैं इसमें घटनाओं का महीना दर महीना क्रमवार विवरण है अध्याय 6 एवं 7 किसी खास क्षेत्र में व्यक्तिगत अभिरूचि से संबंधित है दो व्यक्ति विवाह अथवा व्यापार के लिए यह जानना चाहते हैं कि एक दूसरे के साथउनका सामंजस्य कैसा होगा, एक दूसरे से उनकी बनेगी अथवा नहीं अध्याय 6 एवं 7 में इन्हीं विषयों का विस्तार से वर्णन है साथ ही कोई भी अपने व्यवसाय, पेशे, भाग्यशाली अंक, भाग्यशाली रंग अथवा स्वास्थ्य के विषय में जानकारीप्राप्त करना चाहता है कोई भी जानना चाहता है कि घर अथवा कार का कौन सा नम्बर उसके लिए भाग्यशाली साबित होगा और कौन सा नम्बर उसके लिए बर्बादी का कारण बनेगा इन सभी विषयों की चर्चा विस्तृत रूप से अध्याय 7 मेंकी गई है

व्यक्ति के नाम का जीवन में बड़ा महत्व होता है नाम के अक्षरों सें ही परिघटना अंक का निर्धारण होता है जब कभी भी परिघटना अंक प्रतिकूल अथवा कार्मिक आते हैं तो हमें जीवन में कठिनाइयों अथवा परेशानियों का सामना करनापड़ता है यह परेशानी हमारे लिए अनेक रूपों में सकती है जैसे दफ्तर में तनाव, व्यापार अथवा व्यवसाय में नुकसान या पति/पत्नि से अलगाव, तलाक अथवा अन्य प्रकार के सम्बन्धों में भावनात्मक आघात के रूप में या चोट, दुर्घटना, बीमारी आदि के द्वारा शारीरिक कष्ट के रूप में भी हो सकता है अत : नाम की इस नकारात्मकता को दूर कर इन आसन्न परेशानियों से बचने के लिए नाम के अक्षरों में कुछ फेर बदल करने की सलाह दी जाती है ताकि प्रतिकूल अथवाकार्मिक परिघटना अङ्कों के दुष्प्रभाव से बचा जा सके हमने अपने अनुभवों में यह पाया है कि यह आश्चर्यजनक रूप से कार्य करता है तथा आने वाले अथवा चल रहे बुरे समय को अच्छे समय में बदल देता है नाम के उचित परिवर्त्तन सेघटनाएँ प्रभावित होती हैं ऐसा कहा जाता है कि भाग्य के अनुसार जीवन की मुख्य घटनाएँ निश्चित हैं फिर भी समय और अङ्कों के उचित चयन से सकारात्मक प्रभाव को बढ़ाया एवं नकारात्मक प्रभाव को घटाया जा सकता है अपनेअनुभव में हमने ऐसा होते देखा है

पिछले 15 वर्षों में हमने हजारों व्यक्तियों की अस्र कुंडलियों का विश्लेषण किया है उनमें से 80 को चुनकर इस पुस्तक में उदाहरण के लिए प्रयुक्त किया गया है तथा उनका विशद विश्लेषण पाठकों के लाभ के लिए प्रस्तुत किया गया है आशा है कि पाठक गण इसका भरपूर लाभ उठाएँगे तथा इस क्षेत्र में शोध को और आगे बढ़ाकर नया आयाम जोड़ेंगे

 

विषय-सूची

 

लेखक द्वय का परिचय

ix

 

प्रस्तावना

xiii

1

अङ्कों का विज्ञान

1

 

भूमिका

 
 

अङ्क ज्योतिष का उद्भव एवं प्रारंभिक पृष्ठभूमि

 
 

अङ्क के निहित अर्थ

 
 

दूसरी संख्याएँ

 
 

यौगिक अङ्क

 
 

पूर्व जन्म के कर्मों से संबंधित अङ्क-कार्मिक अङ्क

 

2

विशिष्ट एवं सामान्य अङ्क

35

 

भूमिका

 
 

भाग्यअङ्क

 
 

योग्यता अङ्क

 
 

हृदय अङ्क

 
 

रोमांस एवं प्रेम सम्बन्ध

 
 

व्यक्तित्व अस्र

 
 

चरम अङ्क

 
 

चुनौती अङ्क

 
 

सामान्य अङ्क

 
 

अङ्कों की समक्रमण सारणी

 
 

अङ्कों का संश्लेषण

 
 

निष्कर्ष अर्थ

 

3

चरित्र विन्यास

81

 

भूमिका

 
 

प्रबलता सारणी

 
 

स्वभाव

 
 

स्वभाव की रूपरेखा

 
 

महानता का मापदंड-यश अथवा अपयश

 
 

व्यावसायिक मार्गदर्शन

 
 

निष्कर्ष

 

4

अङ्क कुण्डली

129

 

भूत, वर्तमान एवं भविष्य का ज्ञान

 
 

भूमिका

 
 

जन्म-बल काल

 
 

जीवन का विभाजन-चार चतुर्थांश (कलश)

 
 

व्यक्तिगत वर्ष

 
 

परिघटना अड

 
 

अङ्क कुण्डली

 
 

महत्वपूर्ण परिघटना अङ्क एवं अक्षर

 
 

महत्वपूर्ण व्यक्तिगत वर्ष

 
 

निष्कर्ष

 

5

परिघटना अङ्कों एवं अक्षरों के अर्थ

181

 

भूमिका

 
 

परिघटना अङ्कों के अर्थ

 
 

अक्षरों के विहित अर्थ

 
 

व्यक्तिगत महीना- महीना दर महीना घटनाओं की तालिका

 
 

निष्कर्ष

 

6

प्रेम एवं विवाह, अलगाव एवं तलाक, सामान्य साहचर्य एवं व्यावसायिक साझेदारी

221

 

भूमिंका

 
 

सम्बन्धों का मापदंड

 
 

व्यावसायिक साझेदारी

 
 

निष्कर्ष

 

7

वैयक्तिक अभिरूचि के क्षेत्र

273

 

पेशा/व्यवसाय

 
 

भाग्यशाली अङ्क

 
 

रंग

 
 

ग्रह एवं बेशकीमती रत्न

 
 

स्वास्थ्य घर, शहर, टेलीफोन एवं कार के नम्बर

 
 

बच्चे का नामकरण, नाम परिवर्तन

 
 

अन्तिम शब्द