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अपराध और अर्थशास्त्र - Aparadh Aur Arthashaastra

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अपराध और अर्थशास्त्र - Aparadh Aur Arthashaastra

संसार में प्राचीन काल से ही पाप के रूप में अपराध फैला हुआ है। पहले समझा जाता था कि व्यक्ति के बुरे कर्म, सुरा, क्रोध, द्यूत और स्वप्न उससे दुष्कृत्य करा देते हैं। बुरी आत्मा का प्रभाव भी किसी हद तक पाप कर्म कराता था। लेकिन धीरे-धीरे धारणायें बदलतीं गईं। पाप के लिए व्यक्ति के साथ ही मनोवैज्ञानिक पहलु को महत्त्व दिया जाने लगा।

प्राचीन काल के सभी धर्मग्रन्थों वेद, स्मृति, धर्मसूत्र, इतिहास पुराण, महाभारत, रामायण, श्रीमद् भगवत गीता से लेकर आधुनिक काल के अपराध का स्वरूप, कारण, परिणाम, दण्ड आदि क्या थे इसका लेखाजोखा बड़े सुरुचिपूर्ण ढंग से पुस्तक में प्रस्तुत किया गया है। अपराध जैसे गम्भीर विषय को रोचकता प्रदान करते हुए सभी प्राचीन ग्रन्थों का निचोड़ इस पुस्तक के विभिन्न अध्यायों के रूप में संजोया गया है।

आधुनिक युग में बढ़ते अपराधों पर किस प्रकार नियंत्रण किया जा सकता है। इसके लिए यह पुस्तक सहायक सिद्ध होगी। अपराध विषय पर जटिल व्याख्यानों में पुस्तक ने आधार स्तम्भ का कार्य किया है। एक ही पुस्तक में अपराध विषयक सम्पूर्ण जानकारी समाहित है जिसमें प्राचीन से लेकर आधुनिक अपराध को बारीकी से समेटा गया है।

मनोवैज्ञानिक चिकित्सा पद्यति और सदाचार द्वारा उदात्तीकरण को महत्त्व दिया है।

संसार में प्राचीन काल से ही पाप के रूप में अपराध फैला हुआ है। पहले समझा जाता था कि व्यक्ति के बुरे कर्म, सुरा, क्रोध, द्यूत और स्वप्न उससे दुष्कृत्य करा देते हैं। बुरी आत्मा का प्रभाव भी किसी हद तक पाप कर्म कराता था। लेकिन धीरे-धीरे धारणायें बदलतीं गईं। पाप के लिए व्यक्ति के साथ ही मनोवैज्ञानिक पहलु को महत्त्व दिया जाने लगा।

प्राचीन काल के सभी धर्मग्रन्थों वेद, स्मृति, धर्मसूत्र, इतिहास पुराण, महाभारत, रामायण, श्रीमद् भगवत गीता से लेकर आधुनिक काल के अपराध का स्वरूप, कारण, परिणाम, दण्ड आदि क्या थे इसका लेखाजोखा बड़े सुरुचिपूर्ण ढंग से पुस्तक में प्रस्तुत किया गया है। अपराध जैसे गम्भीर विषय को रोचकता प्रदान करते हुए सभी प्राचीन ग्रन्थों का निचोड़ इस पुस्तक के विभिन्न अध्यायों के रूप में संजोया गया है।

आधुनिक युग में बढ़ते अपराधों पर किस प्रकार नियंत्रण किया जा सकता है। इसके लिए यह पुस्तक सहायक सिद्ध होगी। अपराध विषय पर जटिल व्याख्यानों में पुस्तक ने आधार स्तम्भ का कार्य किया है। एक ही पुस्तक में अपराध विषयक सम्पूर्ण जानकारी समाहित है जिसमें प्राचीन से लेकर आधुनिक अपराध को बारीकी से समेटा गया है।

मनोवैज्ञानिक चिकित्सा पद्यति और सदाचार द्वारा उदात्तीकरण को महत्त्व दिया है।

$5.32
अपराध और अर्थशास्त्र - Aparadh Aur Arthashaastra
$5.32

Description

संसार में प्राचीन काल से ही पाप के रूप में अपराध फैला हुआ है। पहले समझा जाता था कि व्यक्ति के बुरे कर्म, सुरा, क्रोध, द्यूत और स्वप्न उससे दुष्कृत्य करा देते हैं। बुरी आत्मा का प्रभाव भी किसी हद तक पाप कर्म कराता था। लेकिन धीरे-धीरे धारणायें बदलतीं गईं। पाप के लिए व्यक्ति के साथ ही मनोवैज्ञानिक पहलु को महत्त्व दिया जाने लगा।

प्राचीन काल के सभी धर्मग्रन्थों वेद, स्मृति, धर्मसूत्र, इतिहास पुराण, महाभारत, रामायण, श्रीमद् भगवत गीता से लेकर आधुनिक काल के अपराध का स्वरूप, कारण, परिणाम, दण्ड आदि क्या थे इसका लेखाजोखा बड़े सुरुचिपूर्ण ढंग से पुस्तक में प्रस्तुत किया गया है। अपराध जैसे गम्भीर विषय को रोचकता प्रदान करते हुए सभी प्राचीन ग्रन्थों का निचोड़ इस पुस्तक के विभिन्न अध्यायों के रूप में संजोया गया है।

आधुनिक युग में बढ़ते अपराधों पर किस प्रकार नियंत्रण किया जा सकता है। इसके लिए यह पुस्तक सहायक सिद्ध होगी। अपराध विषय पर जटिल व्याख्यानों में पुस्तक ने आधार स्तम्भ का कार्य किया है। एक ही पुस्तक में अपराध विषयक सम्पूर्ण जानकारी समाहित है जिसमें प्राचीन से लेकर आधुनिक अपराध को बारीकी से समेटा गया है।

मनोवैज्ञानिक चिकित्सा पद्यति और सदाचार द्वारा उदात्तीकरण को महत्त्व दिया है।