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भागीरथीदर्शनम् महाकाव्यम् (संस्कृत एवं हिंदी अनुवाद)-Bhagirathidarshanam Mahakavyam byDr. Goswami Balbhadra Prasad Shastri

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भागीरथीदर्शनम् महाकाव्यम् (संस्कृत एवं हिंदी अनुवाद)-Bhagirathidarshanam Mahakavyam byDr. Goswami Balbhadra Prasad Shastri

रचनाकार ने इस महाकाव्य में जीवननीति, इतिहास, राजनैतिक घटनाएं, सामाजिक विचार और धार्मिक भावनाओं को एक काव्यात्मक रूप में प्रस्तुत किया है। 

कुछ महत्वपूर्ण बिंदु:

  • यह महाकाव्य 19 तरंगों (waves / तरंगे) में विभक्त है। 

  • कुल 717 श्लोक इसमें सम्मिलित हैं। 

  • इस रचना में कवि ने इन्दिरा गांधी एवं राजीव गांधी के व्यक्तित्व, घटनाओं और बलिदान का वर्णन किया है। 

  • प्रत्येक तरंग का विशेष नाम है — जैसे “इन्दिरा शैशवम्”, “प्रधानमंत्री पदग्रहणम्”, “युवा आन्दोलनम्”, “आपातकाल वर्णनम्” इत्यादि। 

  • पाठ्यक्रम/तरंगों में प्रकृति, स्थानीय तीर्थ, समाज, राजनीति, पवित्र गंगा (भागीरथी) आदि का वर्णन है। 

  • इस काव्य की विशेषता यह है कि इसे पारंपरिक सर्ग विभाजन (अध्याय विभाजन) न करके तरंगों में एकल धारा के रूप में बाँधा गया है। 

  • रचनाकार ने इस महाकाव्य में जीवन परिचय के कुछ श्लोक भी शामिल किए हैं, जिससे यह केवल महाकाव्यात्मक वर्णन नहीं मात्र, लेखक की आत्मकथा का स्पर्श भी प्राप्त करता है। 

  • इस रचना का उद्देश्य भागीरथी (गंगा) की पवित्रता, महिमा और मानव जीवन से उसका सम्बन्ध दिखाना है — इसलिए नाम “भागीरथीदर्शनम्” रखा गया है। 

  • यह कृति न केवल साहित्यपरक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि धार्मिक-सांस्कृतिक दृष्टि से भी, क्योंकि इसमें गंगा, तीर्थ, पाप-कल्याण आदि विषयों को समाहित किया गया है।

  • प्रकाशक नाग प्रकाशक द्वारा “विमला हिन्दी टीकोपेतम्” उपसंस्करण भी प्रकाशित हुआ है जिसमें हिन्दी टीका (समर्थन व्याख्या) भी संलग्न है।

रचनाकार ने इस महाकाव्य में जीवननीति, इतिहास, राजनैतिक घटनाएं, सामाजिक विचार और धार्मिक भावनाओं को एक काव्यात्मक रूप में प्रस्तुत किया है। 

कुछ महत्वपूर्ण बिंदु:

  • यह महाकाव्य 19 तरंगों (waves / तरंगे) में विभक्त है। 

  • कुल 717 श्लोक इसमें सम्मिलित हैं। 

  • इस रचना में कवि ने इन्दिरा गांधी एवं राजीव गांधी के व्यक्तित्व, घटनाओं और बलिदान का वर्णन किया है। 

  • प्रत्येक तरंग का विशेष नाम है — जैसे “इन्दिरा शैशवम्”, “प्रधानमंत्री पदग्रहणम्”, “युवा आन्दोलनम्”, “आपातकाल वर्णनम्” इत्यादि। 

  • पाठ्यक्रम/तरंगों में प्रकृति, स्थानीय तीर्थ, समाज, राजनीति, पवित्र गंगा (भागीरथी) आदि का वर्णन है। 

  • इस काव्य की विशेषता यह है कि इसे पारंपरिक सर्ग विभाजन (अध्याय विभाजन) न करके तरंगों में एकल धारा के रूप में बाँधा गया है। 

  • रचनाकार ने इस महाकाव्य में जीवन परिचय के कुछ श्लोक भी शामिल किए हैं, जिससे यह केवल महाकाव्यात्मक वर्णन नहीं मात्र, लेखक की आत्मकथा का स्पर्श भी प्राप्त करता है। 

  • इस रचना का उद्देश्य भागीरथी (गंगा) की पवित्रता, महिमा और मानव जीवन से उसका सम्बन्ध दिखाना है — इसलिए नाम “भागीरथीदर्शनम्” रखा गया है। 

  • यह कृति न केवल साहित्यपरक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि धार्मिक-सांस्कृतिक दृष्टि से भी, क्योंकि इसमें गंगा, तीर्थ, पाप-कल्याण आदि विषयों को समाहित किया गया है।

  • प्रकाशक नाग प्रकाशक द्वारा “विमला हिन्दी टीकोपेतम्” उपसंस्करण भी प्रकाशित हुआ है जिसमें हिन्दी टीका (समर्थन व्याख्या) भी संलग्न है।

$3.19
भागीरथीदर्शनम् महाकाव्यम् (संस्कृत एवं हिंदी अनुवाद)-Bhagirathidarshanam Mahakavyam byDr. Goswami Balbhadra Prasad Shastri
$3.19

Description

रचनाकार ने इस महाकाव्य में जीवननीति, इतिहास, राजनैतिक घटनाएं, सामाजिक विचार और धार्मिक भावनाओं को एक काव्यात्मक रूप में प्रस्तुत किया है। 

कुछ महत्वपूर्ण बिंदु:

  • यह महाकाव्य 19 तरंगों (waves / तरंगे) में विभक्त है। 

  • कुल 717 श्लोक इसमें सम्मिलित हैं। 

  • इस रचना में कवि ने इन्दिरा गांधी एवं राजीव गांधी के व्यक्तित्व, घटनाओं और बलिदान का वर्णन किया है। 

  • प्रत्येक तरंग का विशेष नाम है — जैसे “इन्दिरा शैशवम्”, “प्रधानमंत्री पदग्रहणम्”, “युवा आन्दोलनम्”, “आपातकाल वर्णनम्” इत्यादि। 

  • पाठ्यक्रम/तरंगों में प्रकृति, स्थानीय तीर्थ, समाज, राजनीति, पवित्र गंगा (भागीरथी) आदि का वर्णन है। 

  • इस काव्य की विशेषता यह है कि इसे पारंपरिक सर्ग विभाजन (अध्याय विभाजन) न करके तरंगों में एकल धारा के रूप में बाँधा गया है। 

  • रचनाकार ने इस महाकाव्य में जीवन परिचय के कुछ श्लोक भी शामिल किए हैं, जिससे यह केवल महाकाव्यात्मक वर्णन नहीं मात्र, लेखक की आत्मकथा का स्पर्श भी प्राप्त करता है। 

  • इस रचना का उद्देश्य भागीरथी (गंगा) की पवित्रता, महिमा और मानव जीवन से उसका सम्बन्ध दिखाना है — इसलिए नाम “भागीरथीदर्शनम्” रखा गया है। 

  • यह कृति न केवल साहित्यपरक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि धार्मिक-सांस्कृतिक दृष्टि से भी, क्योंकि इसमें गंगा, तीर्थ, पाप-कल्याण आदि विषयों को समाहित किया गया है।

  • प्रकाशक नाग प्रकाशक द्वारा “विमला हिन्दी टीकोपेतम्” उपसंस्करण भी प्रकाशित हुआ है जिसमें हिन्दी टीका (समर्थन व्याख्या) भी संलग्न है।