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भरतचरितं महाकाव्यम्-Bharatacharitam Bahaakaavyam

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भरतचरितं महाकाव्यम्-Bharatacharitam Bahaakaavyam

श्रीमद्भागवतमहापुराण के पंचम स्कन्ध के सप्तम से आरंभ कर चतुर्दश अध्याय तक वर्णित जडभरत के इतिवृत्त को आधार मानकर लिखा गया नौ सर्गों वाला 'भरतचरितम्' शान्तरसप्रधान महाकाव्य है, जिसमें उपजाति, अनुष्टुप्, द्रुतविलम्बित, वंशस्थ, वियोगिनी तथा मालिनी वृत्त प्रयुक्त हैं। प्रथम सर्ग में भारतवर्णन, भरत की बाललीलाएँ तथा ऋषभके द्वारा उनका राज्याभिषेक, द्वितीय सर्ग में भरत का प्रशासन, विवाह, ज्ञान-वैराग्य से संवाद तथा उनका वन के लिए प्रस्थान, तृतीय में पुलहाश्रम तथा चक्रवती का वर्णन, चतुर्थ में ग्रीष्मवर्णन, भरत की साधना तथा मृगशिशु की प्राप्ति, पंचम में भरत की मृगशिशु में आसक्ति तथा प्रभात वर्णन, षष्ठ में भरत का शरीरत्याग, मृग की योनि में जन्म और ब्राह्मण का पुत्र होना, सप्तम में ब्राह्मण भरत का बलि के लिए पकड़ा जाना और काली के द्वारा शूद्रपतिका विनाश, अष्टम में भरत की पालकी ढोने में नियुक्ति तथा रहूगण का पश्चात्ताप और नवम में भरत रहूगण का आध्यात्मिक संवाद तथा भरत की मुक्ति, ये विषय मुख्य रूप से वर्णित हैं ।

श्रीमद्भागवतमहापुराण के पंचम स्कन्ध के सप्तम से आरंभ कर चतुर्दश अध्याय तक वर्णित जडभरत के इतिवृत्त को आधार मानकर लिखा गया नौ सर्गों वाला 'भरतचरितम्' शान्तरसप्रधान महाकाव्य है, जिसमें उपजाति, अनुष्टुप्, द्रुतविलम्बित, वंशस्थ, वियोगिनी तथा मालिनी वृत्त प्रयुक्त हैं। प्रथम सर्ग में भारतवर्णन, भरत की बाललीलाएँ तथा ऋषभके द्वारा उनका राज्याभिषेक, द्वितीय सर्ग में भरत का प्रशासन, विवाह, ज्ञान-वैराग्य से संवाद तथा उनका वन के लिए प्रस्थान, तृतीय में पुलहाश्रम तथा चक्रवती का वर्णन, चतुर्थ में ग्रीष्मवर्णन, भरत की साधना तथा मृगशिशु की प्राप्ति, पंचम में भरत की मृगशिशु में आसक्ति तथा प्रभात वर्णन, षष्ठ में भरत का शरीरत्याग, मृग की योनि में जन्म और ब्राह्मण का पुत्र होना, सप्तम में ब्राह्मण भरत का बलि के लिए पकड़ा जाना और काली के द्वारा शूद्रपतिका विनाश, अष्टम में भरत की पालकी ढोने में नियुक्ति तथा रहूगण का पश्चात्ताप और नवम में भरत रहूगण का आध्यात्मिक संवाद तथा भरत की मुक्ति, ये विषय मुख्य रूप से वर्णित हैं ।

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भरतचरितं महाकाव्यम्-Bharatacharitam Bahaakaavyam

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श्रीमद्भागवतमहापुराण के पंचम स्कन्ध के सप्तम से आरंभ कर चतुर्दश अध्याय तक वर्णित जडभरत के इतिवृत्त को आधार मानकर लिखा गया नौ सर्गों वाला 'भरतचरितम्' शान्तरसप्रधान महाकाव्य है, जिसमें उपजाति, अनुष्टुप्, द्रुतविलम्बित, वंशस्थ, वियोगिनी तथा मालिनी वृत्त प्रयुक्त हैं। प्रथम सर्ग में भारतवर्णन, भरत की बाललीलाएँ तथा ऋषभके द्वारा उनका राज्याभिषेक, द्वितीय सर्ग में भरत का प्रशासन, विवाह, ज्ञान-वैराग्य से संवाद तथा उनका वन के लिए प्रस्थान, तृतीय में पुलहाश्रम तथा चक्रवती का वर्णन, चतुर्थ में ग्रीष्मवर्णन, भरत की साधना तथा मृगशिशु की प्राप्ति, पंचम में भरत की मृगशिशु में आसक्ति तथा प्रभात वर्णन, षष्ठ में भरत का शरीरत्याग, मृग की योनि में जन्म और ब्राह्मण का पुत्र होना, सप्तम में ब्राह्मण भरत का बलि के लिए पकड़ा जाना और काली के द्वारा शूद्रपतिका विनाश, अष्टम में भरत की पालकी ढोने में नियुक्ति तथा रहूगण का पश्चात्ताप और नवम में भरत रहूगण का आध्यात्मिक संवाद तथा भरत की मुक्ति, ये विषय मुख्य रूप से वर्णित हैं ।