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इष्टापूर्त्तकौमुदी: Ishta Purta Kaumudi by Dr. Balaji Shatapathi

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इष्टापूर्त्तकौमुदी: Ishta Purta Kaumudi by Dr. Balaji Shatapathi

भारतीय ज्ञान निधियों का संग्रह यह का "इष्टापूर्त्तकौमुदी" ग्रन्थ पौरोहित्य विधियों रहस्योद्घाटन कर रहा है। पारम्परिक विधानों का संग्रह "इष्टापूर्त्तकौमुदी" उन समस्त लोक व्यवहृत कल्याणकारी मूल्यों का दिग्दर्शन करा रहा है, जिसके द्वारा समाज का उदारीकरण के साथ-साथ यह लौकिक तथा पारलौकिक गन्तव्यों का विवरण सोदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।
16
वीं सदी के विशिष्ट विद्वान् आचार्य प्रवर पं. कमलाकर भट्ट द्वारा रचित "पूर्त्तकमलाकर" पाण्डुलिपि का आमूलचूल अध्ययन करने के अनन्तर यह निर्णय किया कि मैं इस अमूल्य ग्रन्थ का सम्पादन करूँ। समाज, देश-काल-पात्रानुसार परिवर्तित होता है, किन्तु भाषान्तर के द्वारा विधियों को संक्षिप्त-करण करते-करते, मैंने विधि के उस मूलस्वरूप को कुरुप होते परिलक्षित किया है। कारण शताधिक वषो की पुरातन कठिन रचना को वर्तमान समय में व्यक्त करने में यह स्वभाविक सा प्रतीत होता है। अतः अनेक प्रामाणिक आचायो का सहयोग लेते हुए मूल ग्रन्थ की कठिन रचना को सरलीकरण भाव में व्यक्त किया गया है, जिससे ग्रन्थ के भाव या विधियों के साथ छेड़-छाड़ न हो। अतः जहाँ तक सम्भव हो सका चारों वेद, अनेक पुराणादि ग्रन्थों की प्रामाण्यता एवं यथार्थता को व्यक्त किया गया है।
आशा है "इष्टापूर्त्तकौमुदी" की यह भावार्थप्रकाशिका विश्व संस्कृत वाघ्मय के प्रयोजन में सार्थक होगी।

भारतीय ज्ञान निधियों का संग्रह यह का "इष्टापूर्त्तकौमुदी" ग्रन्थ पौरोहित्य विधियों रहस्योद्घाटन कर रहा है। पारम्परिक विधानों का संग्रह "इष्टापूर्त्तकौमुदी" उन समस्त लोक व्यवहृत कल्याणकारी मूल्यों का दिग्दर्शन करा रहा है, जिसके द्वारा समाज का उदारीकरण के साथ-साथ यह लौकिक तथा पारलौकिक गन्तव्यों का विवरण सोदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।
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वीं सदी के विशिष्ट विद्वान् आचार्य प्रवर पं. कमलाकर भट्ट द्वारा रचित "पूर्त्तकमलाकर" पाण्डुलिपि का आमूलचूल अध्ययन करने के अनन्तर यह निर्णय किया कि मैं इस अमूल्य ग्रन्थ का सम्पादन करूँ। समाज, देश-काल-पात्रानुसार परिवर्तित होता है, किन्तु भाषान्तर के द्वारा विधियों को संक्षिप्त-करण करते-करते, मैंने विधि के उस मूलस्वरूप को कुरुप होते परिलक्षित किया है। कारण शताधिक वषो की पुरातन कठिन रचना को वर्तमान समय में व्यक्त करने में यह स्वभाविक सा प्रतीत होता है। अतः अनेक प्रामाणिक आचायो का सहयोग लेते हुए मूल ग्रन्थ की कठिन रचना को सरलीकरण भाव में व्यक्त किया गया है, जिससे ग्रन्थ के भाव या विधियों के साथ छेड़-छाड़ न हो। अतः जहाँ तक सम्भव हो सका चारों वेद, अनेक पुराणादि ग्रन्थों की प्रामाण्यता एवं यथार्थता को व्यक्त किया गया है।
आशा है "इष्टापूर्त्तकौमुदी" की यह भावार्थप्रकाशिका विश्व संस्कृत वाघ्मय के प्रयोजन में सार्थक होगी।

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भारतीय ज्ञान निधियों का संग्रह यह का "इष्टापूर्त्तकौमुदी" ग्रन्थ पौरोहित्य विधियों रहस्योद्घाटन कर रहा है। पारम्परिक विधानों का संग्रह "इष्टापूर्त्तकौमुदी" उन समस्त लोक व्यवहृत कल्याणकारी मूल्यों का दिग्दर्शन करा रहा है, जिसके द्वारा समाज का उदारीकरण के साथ-साथ यह लौकिक तथा पारलौकिक गन्तव्यों का विवरण सोदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।
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वीं सदी के विशिष्ट विद्वान् आचार्य प्रवर पं. कमलाकर भट्ट द्वारा रचित "पूर्त्तकमलाकर" पाण्डुलिपि का आमूलचूल अध्ययन करने के अनन्तर यह निर्णय किया कि मैं इस अमूल्य ग्रन्थ का सम्पादन करूँ। समाज, देश-काल-पात्रानुसार परिवर्तित होता है, किन्तु भाषान्तर के द्वारा विधियों को संक्षिप्त-करण करते-करते, मैंने विधि के उस मूलस्वरूप को कुरुप होते परिलक्षित किया है। कारण शताधिक वषो की पुरातन कठिन रचना को वर्तमान समय में व्यक्त करने में यह स्वभाविक सा प्रतीत होता है। अतः अनेक प्रामाणिक आचायो का सहयोग लेते हुए मूल ग्रन्थ की कठिन रचना को सरलीकरण भाव में व्यक्त किया गया है, जिससे ग्रन्थ के भाव या विधियों के साथ छेड़-छाड़ न हो। अतः जहाँ तक सम्भव हो सका चारों वेद, अनेक पुराणादि ग्रन्थों की प्रामाण्यता एवं यथार्थता को व्यक्त किया गया है।
आशा है "इष्टापूर्त्तकौमुदी" की यह भावार्थप्रकाशिका विश्व संस्कृत वाघ्मय के प्रयोजन में सार्थक होगी।