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इतिवुत्तक- Itivuttaka

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इतिवुत्तक- Itivuttaka

"इतिवुत्तक" (Itivuttaka) बौद्ध धर्म से संबंधित एक महत्त्वपूर्ण ग्रंथ है जो थेरवाद बौद्ध परंपरा का हिस्सा है। यह बौद्ध सुत्तपिटक (सुत्तों का संग्रह) के एक भाग के रूप में आता है और इसे "इति-वत्तक" या "इतिवत्तक" भी कहा जाता है। यह ग्रंथ बौद्धों के प्रवचन और उपदेशों का संग्रह है, जिसमें भगवान बुद्ध द्वारा दिए गए 112 छोटे-छोटे सूत्रों (सुत्तों) का समावेश है।

इसमें भगवान बुद्ध ने विभिन्न जीवन के पहलुओं जैसे दुख, सुख, आत्मज्ञान, कर्म, और धम्म (धर्म) के बारे में उपदेश दिए हैं। "इति-वत्तक" का अर्थ है "ऐसा ही कहा गया" और यह उपदेशों और वचनों की पुष्टि करता है जो बुद्ध ने अपने अनुयायियों को दिए थे। यह ग्रंथ बौद्ध साहित्य का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है और बौद्ध शिक्षाओं को समझने के लिए अत्यंत उपयोगी है।

"इतिवुत्तक" (Itivuttaka) बौद्ध धर्म से संबंधित एक महत्त्वपूर्ण ग्रंथ है जो थेरवाद बौद्ध परंपरा का हिस्सा है। यह बौद्ध सुत्तपिटक (सुत्तों का संग्रह) के एक भाग के रूप में आता है और इसे "इति-वत्तक" या "इतिवत्तक" भी कहा जाता है। यह ग्रंथ बौद्धों के प्रवचन और उपदेशों का संग्रह है, जिसमें भगवान बुद्ध द्वारा दिए गए 112 छोटे-छोटे सूत्रों (सुत्तों) का समावेश है।

इसमें भगवान बुद्ध ने विभिन्न जीवन के पहलुओं जैसे दुख, सुख, आत्मज्ञान, कर्म, और धम्म (धर्म) के बारे में उपदेश दिए हैं। "इति-वत्तक" का अर्थ है "ऐसा ही कहा गया" और यह उपदेशों और वचनों की पुष्टि करता है जो बुद्ध ने अपने अनुयायियों को दिए थे। यह ग्रंथ बौद्ध साहित्य का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है और बौद्ध शिक्षाओं को समझने के लिए अत्यंत उपयोगी है।

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Description

"इतिवुत्तक" (Itivuttaka) बौद्ध धर्म से संबंधित एक महत्त्वपूर्ण ग्रंथ है जो थेरवाद बौद्ध परंपरा का हिस्सा है। यह बौद्ध सुत्तपिटक (सुत्तों का संग्रह) के एक भाग के रूप में आता है और इसे "इति-वत्तक" या "इतिवत्तक" भी कहा जाता है। यह ग्रंथ बौद्धों के प्रवचन और उपदेशों का संग्रह है, जिसमें भगवान बुद्ध द्वारा दिए गए 112 छोटे-छोटे सूत्रों (सुत्तों) का समावेश है।

इसमें भगवान बुद्ध ने विभिन्न जीवन के पहलुओं जैसे दुख, सुख, आत्मज्ञान, कर्म, और धम्म (धर्म) के बारे में उपदेश दिए हैं। "इति-वत्तक" का अर्थ है "ऐसा ही कहा गया" और यह उपदेशों और वचनों की पुष्टि करता है जो बुद्ध ने अपने अनुयायियों को दिए थे। यह ग्रंथ बौद्ध साहित्य का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है और बौद्ध शिक्षाओं को समझने के लिए अत्यंत उपयोगी है।