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कर्म जिज्ञासा-Karma Jigyasa (2009)

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कर्म जिज्ञासा-Karma Jigyasa (2009)

एक नया सार्थक कदम

आज जन-मानस जिस ओर अवक्रमित है, वह ढलान चिन्ता का विषय है। मनुष्य की मेधा एवं अन्तर्मन व्यथा के वर्तुल से ग्रस्त हैं। वह अपनी असली डगर से भटक गया है। ऐसे विषम क्षणों में मनुष्य के पथ को आलोकित करने हेतु श्रुतप्रेमी साध्वी-युगल निधि-कृपा श्री द्वारा सृजित साहित्य प्रज्वलित दीपक का काम करता है। साध्वी युगल की सृजना उनके साधना-जीवन की तपस्विता और मनस्विता का अद्भुत मणि-कांचन संयोग है।

कर्म-सिद्धान्त के रसायन की यह दिव्य प्याली आत्मरसिक पिपासुओं के हाथ में सौंपते हुए मैत्री चैरिटेबल फाउण्डेशन अत्यन्त आनन्द का अनुभव कर रहा है।

प्रस्तुत 'कर्म जिज्ञासा' जिज्ञासुओं के जीवन को अध्यात्म के दिव्यामृत से सराबोर करने में उपयोगी है। इसका एक-एक पन्ना ऐसा स्फुलिंग है जो अज्ञान रूपी सघन और विस्तृत अंधकार को एक पल में, सूखी घास की भाँति जलाकर भस्म कर सकता है।

एक नया सार्थक कदम

आज जन-मानस जिस ओर अवक्रमित है, वह ढलान चिन्ता का विषय है। मनुष्य की मेधा एवं अन्तर्मन व्यथा के वर्तुल से ग्रस्त हैं। वह अपनी असली डगर से भटक गया है। ऐसे विषम क्षणों में मनुष्य के पथ को आलोकित करने हेतु श्रुतप्रेमी साध्वी-युगल निधि-कृपा श्री द्वारा सृजित साहित्य प्रज्वलित दीपक का काम करता है। साध्वी युगल की सृजना उनके साधना-जीवन की तपस्विता और मनस्विता का अद्भुत मणि-कांचन संयोग है।

कर्म-सिद्धान्त के रसायन की यह दिव्य प्याली आत्मरसिक पिपासुओं के हाथ में सौंपते हुए मैत्री चैरिटेबल फाउण्डेशन अत्यन्त आनन्द का अनुभव कर रहा है।

प्रस्तुत 'कर्म जिज्ञासा' जिज्ञासुओं के जीवन को अध्यात्म के दिव्यामृत से सराबोर करने में उपयोगी है। इसका एक-एक पन्ना ऐसा स्फुलिंग है जो अज्ञान रूपी सघन और विस्तृत अंधकार को एक पल में, सूखी घास की भाँति जलाकर भस्म कर सकता है।

$3.19
कर्म जिज्ञासा-Karma Jigyasa (2009)
$3.19

Description

एक नया सार्थक कदम

आज जन-मानस जिस ओर अवक्रमित है, वह ढलान चिन्ता का विषय है। मनुष्य की मेधा एवं अन्तर्मन व्यथा के वर्तुल से ग्रस्त हैं। वह अपनी असली डगर से भटक गया है। ऐसे विषम क्षणों में मनुष्य के पथ को आलोकित करने हेतु श्रुतप्रेमी साध्वी-युगल निधि-कृपा श्री द्वारा सृजित साहित्य प्रज्वलित दीपक का काम करता है। साध्वी युगल की सृजना उनके साधना-जीवन की तपस्विता और मनस्विता का अद्भुत मणि-कांचन संयोग है।

कर्म-सिद्धान्त के रसायन की यह दिव्य प्याली आत्मरसिक पिपासुओं के हाथ में सौंपते हुए मैत्री चैरिटेबल फाउण्डेशन अत्यन्त आनन्द का अनुभव कर रहा है।

प्रस्तुत 'कर्म जिज्ञासा' जिज्ञासुओं के जीवन को अध्यात्म के दिव्यामृत से सराबोर करने में उपयोगी है। इसका एक-एक पन्ना ऐसा स्फुलिंग है जो अज्ञान रूपी सघन और विस्तृत अंधकार को एक पल में, सूखी घास की भाँति जलाकर भस्म कर सकता है।