
कठोपनिषद् - Kathopanishad
कठोपनिषद् में जीवन और मृत्यु उपरान्त के सत्य का बहुत विस्तृत वर्णन है। नचिकेता आत्मज्ञान के सर्वोच्च शिष्य हैं, जिनमें प्रथम कोटि के शिष्य के सम्पूर्ण गुणों के दर्शन होते हैं।
अपने पिता के द्वारा यमराज के पास भेजे जाने पर भी उनके मन में पिता के प्रति कोई क्षोभ नहीं। वह तो यमराज से पहला वर ही यह माँगते हैं कि उनके पिता शान्तमनी हों।
दूसरे वर में अग्न विद्या का ज्ञान देने के पश्चात् नचिकेता की तीक्ष्ण बुद्धि एवं दृढ़ता से प्रसन्न होकर यमराज अपनी ओर से उसे वित्तमयी माला उपहार देते हैं और यज्ञ की अग्न को नचिकेता अग्न का नाम देते हैं परन्तु यमराज जैसे विलक्षण गुरु से यह प्रशंसा पाकर भी नचिकेता विभ्रान्त नहीं हुए।
कठोपनिषद् में जीवन और मृत्यु उपरान्त के सत्य का बहुत विस्तृत वर्णन है। नचिकेता आत्मज्ञान के सर्वोच्च शिष्य हैं, जिनमें प्रथम कोटि के शिष्य के सम्पूर्ण गुणों के दर्शन होते हैं।
अपने पिता के द्वारा यमराज के पास भेजे जाने पर भी उनके मन में पिता के प्रति कोई क्षोभ नहीं। वह तो यमराज से पहला वर ही यह माँगते हैं कि उनके पिता शान्तमनी हों।
दूसरे वर में अग्न विद्या का ज्ञान देने के पश्चात् नचिकेता की तीक्ष्ण बुद्धि एवं दृढ़ता से प्रसन्न होकर यमराज अपनी ओर से उसे वित्तमयी माला उपहार देते हैं और यज्ञ की अग्न को नचिकेता अग्न का नाम देते हैं परन्तु यमराज जैसे विलक्षण गुरु से यह प्रशंसा पाकर भी नचिकेता विभ्रान्त नहीं हुए।
Description
कठोपनिषद् में जीवन और मृत्यु उपरान्त के सत्य का बहुत विस्तृत वर्णन है। नचिकेता आत्मज्ञान के सर्वोच्च शिष्य हैं, जिनमें प्रथम कोटि के शिष्य के सम्पूर्ण गुणों के दर्शन होते हैं।
अपने पिता के द्वारा यमराज के पास भेजे जाने पर भी उनके मन में पिता के प्रति कोई क्षोभ नहीं। वह तो यमराज से पहला वर ही यह माँगते हैं कि उनके पिता शान्तमनी हों।
दूसरे वर में अग्न विद्या का ज्ञान देने के पश्चात् नचिकेता की तीक्ष्ण बुद्धि एवं दृढ़ता से प्रसन्न होकर यमराज अपनी ओर से उसे वित्तमयी माला उपहार देते हैं और यज्ञ की अग्न को नचिकेता अग्न का नाम देते हैं परन्तु यमराज जैसे विलक्षण गुरु से यह प्रशंसा पाकर भी नचिकेता विभ्रान्त नहीं हुए।

















