
कुँवरजी अग्रवाल
नाट्य के अक्षरबीज -
नाट्य के विविध पहलुओं पर लिखे गये अट्ठाईस विचारोत्तेजक लेखों का संग्रह, जिनकी रेंज हिन्दी नाट्यकर्म के विकास के प्रमुख पड़ावों की चर्चा, लिखित नाट्य और नाट्यप्रस्तुतियों की समीक्षा, दो-एक विशिष्ट नाट्यसिद्धान्तों का स्पष्टीकरण करने से लेकर वर्तमान समय की समग्र नाट्यचिन्ता और सरोकारों से रू-ब-रू कराना तक है। साहित्य के विद्यार्थी, नाट्य के विद्यार्थी, फ़िल्म के अध्येता, समीक्षक, विचारक और मंचकलाओं में रुचि रखने वाले किसी भी गम्भीर पाठक के लिए एक उपयोगी और ज़रूरी पुस्तक।
नाट्य के अक्षरबीज -
नाट्य के विविध पहलुओं पर लिखे गये अट्ठाईस विचारोत्तेजक लेखों का संग्रह, जिनकी रेंज हिन्दी नाट्यकर्म के विकास के प्रमुख पड़ावों की चर्चा, लिखित नाट्य और नाट्यप्रस्तुतियों की समीक्षा, दो-एक विशिष्ट नाट्यसिद्धान्तों का स्पष्टीकरण करने से लेकर वर्तमान समय की समग्र नाट्यचिन्ता और सरोकारों से रू-ब-रू कराना तक है। साहित्य के विद्यार्थी, नाट्य के विद्यार्थी, फ़िल्म के अध्येता, समीक्षक, विचारक और मंचकलाओं में रुचि रखने वाले किसी भी गम्भीर पाठक के लिए एक उपयोगी और ज़रूरी पुस्तक।
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नाट्य के विविध पहलुओं पर लिखे गये अट्ठाईस विचारोत्तेजक लेखों का संग्रह, जिनकी रेंज हिन्दी नाट्यकर्म के विकास के प्रमुख पड़ावों की चर्चा, लिखित नाट्य और नाट्यप्रस्तुतियों की समीक्षा, दो-एक विशिष्ट नाट्यसिद्धान्तों का स्पष्टीकरण करने से लेकर वर्तमान समय की समग्र नाट्यचिन्ता और सरोकारों से रू-ब-रू कराना तक है। साहित्य के विद्यार्थी, नाट्य के विद्यार्थी, फ़िल्म के अध्येता, समीक्षक, विचारक और मंचकलाओं में रुचि रखने वाले किसी भी गम्भीर पाठक के लिए एक उपयोगी और ज़रूरी पुस्तक।














