
श्रीमद्भगवद्गीता - Srimad Bhagavad Gita (1997)
एक आज्ञाकारी पुत्र जिस प्रकार अपने पिता की वसीयत को वास्तविकता में परिणित करता है, उसी प्रकार अपने परम पिता के आदेश' श्रीमद्भगवद्गीता' को हमें अपने जीवन राही इस धरती पर अंकित करना है।
परम पूज्य मां के मुखारविन्द से प्रवाहित सरल हिन्दी में श्रीमद्भगवद्रीता की प्रस्तुत व्याख्या भगवान की वाणी को आधुनिक युग के सन्दर्भ में सार्थक कर रही है।
गीता की इस अभिव्यक्ति में विलक्षणता यह है कि कभी प्यार से, कभी दुलार से और कभी डांटकर, यह एक मां की भांति साधक शिशु के स्तर पर आ, उसका कर थामे उसे अध्यात्म तत्त्व के चरम शिखर की ओर ले जा रही है।
यह दिव्य ग्रन्थ एक सहस्त्रमुखी दर्पण है, जो गुह्यतम ज्ञान के विभिन्न पहलुओं को जिज्ञासु की बुद्धि, सामर्थ्य और क्षमता के अनुसार प्रतिबिम्बित करता है। एक संन्यासी के लिए जहां यह वैराग्य की पराकाष्ठा है, वहीं साधारण संसारी के लिए यह मानुषी सम्बन्धों में अपूर्व सहायक भी है और पथ प्रदर्शक भी। संसार के त्रिविध तापों से मुक्ति पाने के लिए यह एक अमोघ औषध है।
एक आज्ञाकारी पुत्र जिस प्रकार अपने पिता की वसीयत को वास्तविकता में परिणित करता है, उसी प्रकार अपने परम पिता के आदेश' श्रीमद्भगवद्गीता' को हमें अपने जीवन राही इस धरती पर अंकित करना है।
परम पूज्य मां के मुखारविन्द से प्रवाहित सरल हिन्दी में श्रीमद्भगवद्रीता की प्रस्तुत व्याख्या भगवान की वाणी को आधुनिक युग के सन्दर्भ में सार्थक कर रही है।
गीता की इस अभिव्यक्ति में विलक्षणता यह है कि कभी प्यार से, कभी दुलार से और कभी डांटकर, यह एक मां की भांति साधक शिशु के स्तर पर आ, उसका कर थामे उसे अध्यात्म तत्त्व के चरम शिखर की ओर ले जा रही है।
यह दिव्य ग्रन्थ एक सहस्त्रमुखी दर्पण है, जो गुह्यतम ज्ञान के विभिन्न पहलुओं को जिज्ञासु की बुद्धि, सामर्थ्य और क्षमता के अनुसार प्रतिबिम्बित करता है। एक संन्यासी के लिए जहां यह वैराग्य की पराकाष्ठा है, वहीं साधारण संसारी के लिए यह मानुषी सम्बन्धों में अपूर्व सहायक भी है और पथ प्रदर्शक भी। संसार के त्रिविध तापों से मुक्ति पाने के लिए यह एक अमोघ औषध है।
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एक आज्ञाकारी पुत्र जिस प्रकार अपने पिता की वसीयत को वास्तविकता में परिणित करता है, उसी प्रकार अपने परम पिता के आदेश' श्रीमद्भगवद्गीता' को हमें अपने जीवन राही इस धरती पर अंकित करना है।
परम पूज्य मां के मुखारविन्द से प्रवाहित सरल हिन्दी में श्रीमद्भगवद्रीता की प्रस्तुत व्याख्या भगवान की वाणी को आधुनिक युग के सन्दर्भ में सार्थक कर रही है।
गीता की इस अभिव्यक्ति में विलक्षणता यह है कि कभी प्यार से, कभी दुलार से और कभी डांटकर, यह एक मां की भांति साधक शिशु के स्तर पर आ, उसका कर थामे उसे अध्यात्म तत्त्व के चरम शिखर की ओर ले जा रही है।
यह दिव्य ग्रन्थ एक सहस्त्रमुखी दर्पण है, जो गुह्यतम ज्ञान के विभिन्न पहलुओं को जिज्ञासु की बुद्धि, सामर्थ्य और क्षमता के अनुसार प्रतिबिम्बित करता है। एक संन्यासी के लिए जहां यह वैराग्य की पराकाष्ठा है, वहीं साधारण संसारी के लिए यह मानुषी सम्बन्धों में अपूर्व सहायक भी है और पथ प्रदर्शक भी। संसार के त्रिविध तापों से मुक्ति पाने के लिए यह एक अमोघ औषध है।


















