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तर्कसंग्रह - Tarka Samgraha

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तर्कसंग्रह - Tarka Samgraha

यह पुस्तक “तर्कसंग्रहः (Tarka Samgraha)” भारतीय दर्शन की न्याय-वैशेषिक परंपरा से संबंधित एक अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसकी रचना गोविन्दाचार्य ने की है।

इस ग्रंथ में भारतीय तर्कशास्त्र (Indian Logic) के मूल सिद्धांतों को संक्षेप और सरल रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसमें न्याय दर्शन के प्रमुख विषयों — पदार्थ, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष, और समवाय — का विवेचन किया गया है। साथ ही, ज्ञान की प्रक्रिया, प्रमाण, तर्क, अनुमान और वाक्य के दार्शनिक अर्थ की विस्तार से व्याख्या दी गई है।

“तर्कसंग्रह” को तर्कशास्त्र का प्रारंभिक या प्रवेशिक ग्रंथ माना जाता है, जो विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए भारतीय दर्शन के न्याय-विचार का सुलभ परिचय प्रदान करता है। पुस्तक में संस्कृत मूल पाठ के साथ हिंदी अनुवाद दिया गया है, जिससे यह विद्वानों और नए पाठकों दोनों के लिए उपयोगी बनती है।

यह ग्रंथ भारतीय तर्क की उस सूक्ष्म परंपरा का परिचायक है, जिसने ज्ञानमीमांसा और दार्शनिक चिंतन की नींव रखी।

📘 लेखक: गोविन्दाचार्य
📘 भाषा: संस्कृत (हिंदी अनुवाद सहित)
📘 प्रकाशक: चौखंबा सुब्रती प्रकाशन

यह पुस्तक “तर्कसंग्रहः (Tarka Samgraha)” भारतीय दर्शन की न्याय-वैशेषिक परंपरा से संबंधित एक अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसकी रचना गोविन्दाचार्य ने की है।

इस ग्रंथ में भारतीय तर्कशास्त्र (Indian Logic) के मूल सिद्धांतों को संक्षेप और सरल रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसमें न्याय दर्शन के प्रमुख विषयों — पदार्थ, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष, और समवाय — का विवेचन किया गया है। साथ ही, ज्ञान की प्रक्रिया, प्रमाण, तर्क, अनुमान और वाक्य के दार्शनिक अर्थ की विस्तार से व्याख्या दी गई है।

“तर्कसंग्रह” को तर्कशास्त्र का प्रारंभिक या प्रवेशिक ग्रंथ माना जाता है, जो विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए भारतीय दर्शन के न्याय-विचार का सुलभ परिचय प्रदान करता है। पुस्तक में संस्कृत मूल पाठ के साथ हिंदी अनुवाद दिया गया है, जिससे यह विद्वानों और नए पाठकों दोनों के लिए उपयोगी बनती है।

यह ग्रंथ भारतीय तर्क की उस सूक्ष्म परंपरा का परिचायक है, जिसने ज्ञानमीमांसा और दार्शनिक चिंतन की नींव रखी।

📘 लेखक: गोविन्दाचार्य
📘 भाषा: संस्कृत (हिंदी अनुवाद सहित)
📘 प्रकाशक: चौखंबा सुब्रती प्रकाशन

$2.23

Original: $7.44

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तर्कसंग्रह - Tarka Samgraha

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Description

यह पुस्तक “तर्कसंग्रहः (Tarka Samgraha)” भारतीय दर्शन की न्याय-वैशेषिक परंपरा से संबंधित एक अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसकी रचना गोविन्दाचार्य ने की है।

इस ग्रंथ में भारतीय तर्कशास्त्र (Indian Logic) के मूल सिद्धांतों को संक्षेप और सरल रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसमें न्याय दर्शन के प्रमुख विषयों — पदार्थ, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष, और समवाय — का विवेचन किया गया है। साथ ही, ज्ञान की प्रक्रिया, प्रमाण, तर्क, अनुमान और वाक्य के दार्शनिक अर्थ की विस्तार से व्याख्या दी गई है।

“तर्कसंग्रह” को तर्कशास्त्र का प्रारंभिक या प्रवेशिक ग्रंथ माना जाता है, जो विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए भारतीय दर्शन के न्याय-विचार का सुलभ परिचय प्रदान करता है। पुस्तक में संस्कृत मूल पाठ के साथ हिंदी अनुवाद दिया गया है, जिससे यह विद्वानों और नए पाठकों दोनों के लिए उपयोगी बनती है।

यह ग्रंथ भारतीय तर्क की उस सूक्ष्म परंपरा का परिचायक है, जिसने ज्ञानमीमांसा और दार्शनिक चिंतन की नींव रखी।

📘 लेखक: गोविन्दाचार्य
📘 भाषा: संस्कृत (हिंदी अनुवाद सहित)
📘 प्रकाशक: चौखंबा सुब्रती प्रकाशन