
वैदिक अनुष्ठानों का मनोवैज्ञानिक अनुशीलन-Vedic Anushthano ka Manovaigyanik Anusheelan
मनोविज्ञान और अनुष्ठान दोनों आपततः पृथक् पृथक् शास्त्र हैं लेकिन वास्तव में दोनों में परस्पर घनिष्ठ सम्बन्ध है। कर्मकाण्ड के सम्पादन में मनोविज्ञान की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। अभिप्रेरणा और प्रतीकवाद मनोविज्ञान के साथ ही कर्मकाण्ड भी गहराई में छिपे हुए तथ्य हैं। प्रस्तुत ग्रन्थ में मनोवैज्ञानिक दृष्टि से वैदिक कर्म गम्भीर शास्त्रीय विवेचन किया गया है। वैदिक अनुष्ठानों की पृष्ठभूमि में निहित मानसिक प्रेरणा का इसमें प्रामाणिक संधान करने की चेष्टा की गई है। इस प्रकार से यह ग्रन्थ मनोविज्ञान और कर्मकाण्ड दानों के अध्येताओं के लिए अत्यन्त उपादेय है।
मनोविज्ञान और अनुष्ठान दोनों आपततः पृथक् पृथक् शास्त्र हैं लेकिन वास्तव में दोनों में परस्पर घनिष्ठ सम्बन्ध है। कर्मकाण्ड के सम्पादन में मनोविज्ञान की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। अभिप्रेरणा और प्रतीकवाद मनोविज्ञान के साथ ही कर्मकाण्ड भी गहराई में छिपे हुए तथ्य हैं। प्रस्तुत ग्रन्थ में मनोवैज्ञानिक दृष्टि से वैदिक कर्म गम्भीर शास्त्रीय विवेचन किया गया है। वैदिक अनुष्ठानों की पृष्ठभूमि में निहित मानसिक प्रेरणा का इसमें प्रामाणिक संधान करने की चेष्टा की गई है। इस प्रकार से यह ग्रन्थ मनोविज्ञान और कर्मकाण्ड दानों के अध्येताओं के लिए अत्यन्त उपादेय है।
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मनोविज्ञान और अनुष्ठान दोनों आपततः पृथक् पृथक् शास्त्र हैं लेकिन वास्तव में दोनों में परस्पर घनिष्ठ सम्बन्ध है। कर्मकाण्ड के सम्पादन में मनोविज्ञान की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। अभिप्रेरणा और प्रतीकवाद मनोविज्ञान के साथ ही कर्मकाण्ड भी गहराई में छिपे हुए तथ्य हैं। प्रस्तुत ग्रन्थ में मनोवैज्ञानिक दृष्टि से वैदिक कर्म गम्भीर शास्त्रीय विवेचन किया गया है। वैदिक अनुष्ठानों की पृष्ठभूमि में निहित मानसिक प्रेरणा का इसमें प्रामाणिक संधान करने की चेष्टा की गई है। इस प्रकार से यह ग्रन्थ मनोविज्ञान और कर्मकाण्ड दानों के अध्येताओं के लिए अत्यन्त उपादेय है।













