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ये रिश्ता क्या है- Translation of 'On Relationship

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ये रिश्ता क्या है- Translation of 'On Relationship

जे. कृष्णमूर्ति द्वारा लिखित एक महत्वपूर्ण पुस्तक है, जो उनके विचारों और शिक्षाओं का गहन अवलोकन प्रस्तुत करती है।

इस पुस्तक में कृष्णमूर्ति ने रिश्तों की जटिलताओं और उनके मानसिक प्रभावों पर गहन विचार प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने बताया है कि अधिकांश रिश्ते मानसिक छवियों, अपेक्षाओं और पूर्वाग्रहों पर आधारित होते हैं, जो उन्हें आधे-अधूरे और संघर्षपूर्ण बना देते हैं। कृष्णमूर्ति के अनुसार, जब तक हम स्वयं को पूरी तरह से नहीं समझते, तब तक हम सही मायनों में प्रेम और संबंध को नहीं समझ सकते। उन्होंने यह भी कहा कि हम रूढ़ियों के दास हैं और छवि-रचना के खेल को स्वीकार कर परस्पर संबंधों को स्थापित करते हैं, जो हमारी एक रीति बन गई है। इस पुस्तक में कृष्णमूर्ति ने रिश्तों की वास्तविकता और उनके मानसिक प्रभावों पर गहन विचार प्रस्तुत किए हैं।

 

जे. कृष्णमूर्ति द्वारा लिखित एक महत्वपूर्ण पुस्तक है, जो उनके विचारों और शिक्षाओं का गहन अवलोकन प्रस्तुत करती है।

इस पुस्तक में कृष्णमूर्ति ने रिश्तों की जटिलताओं और उनके मानसिक प्रभावों पर गहन विचार प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने बताया है कि अधिकांश रिश्ते मानसिक छवियों, अपेक्षाओं और पूर्वाग्रहों पर आधारित होते हैं, जो उन्हें आधे-अधूरे और संघर्षपूर्ण बना देते हैं। कृष्णमूर्ति के अनुसार, जब तक हम स्वयं को पूरी तरह से नहीं समझते, तब तक हम सही मायनों में प्रेम और संबंध को नहीं समझ सकते। उन्होंने यह भी कहा कि हम रूढ़ियों के दास हैं और छवि-रचना के खेल को स्वीकार कर परस्पर संबंधों को स्थापित करते हैं, जो हमारी एक रीति बन गई है। इस पुस्तक में कृष्णमूर्ति ने रिश्तों की वास्तविकता और उनके मानसिक प्रभावों पर गहन विचार प्रस्तुत किए हैं।

 

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ये रिश्ता क्या है- Translation of 'On Relationship
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Description

जे. कृष्णमूर्ति द्वारा लिखित एक महत्वपूर्ण पुस्तक है, जो उनके विचारों और शिक्षाओं का गहन अवलोकन प्रस्तुत करती है।

इस पुस्तक में कृष्णमूर्ति ने रिश्तों की जटिलताओं और उनके मानसिक प्रभावों पर गहन विचार प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने बताया है कि अधिकांश रिश्ते मानसिक छवियों, अपेक्षाओं और पूर्वाग्रहों पर आधारित होते हैं, जो उन्हें आधे-अधूरे और संघर्षपूर्ण बना देते हैं। कृष्णमूर्ति के अनुसार, जब तक हम स्वयं को पूरी तरह से नहीं समझते, तब तक हम सही मायनों में प्रेम और संबंध को नहीं समझ सकते। उन्होंने यह भी कहा कि हम रूढ़ियों के दास हैं और छवि-रचना के खेल को स्वीकार कर परस्पर संबंधों को स्थापित करते हैं, जो हमारी एक रीति बन गई है। इस पुस्तक में कृष्णमूर्ति ने रिश्तों की वास्तविकता और उनके मानसिक प्रभावों पर गहन विचार प्रस्तुत किए हैं।